पूर्व पीएम शेख हसीना ने कहा- यूनुस अमेरिका के इशारे पर देश को बेच रहे हैं और आतंकवादियों की मदद से सत्ता चला रहे

दुनिया

ढाका
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस अमेरिका के इशारे पर देश को बेच रहे हैं और आतंकवादियों की मदद से सत्ता चला रहे हैं। यह हमला उस समय हुआ है जब देश में एक बार फिर प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि सेना द्वारा दिसंबर में चुनाव की मांग के बाद यूनुस ने इस्तीफे की धमकी दी थी। शेख हसीना ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान ने अमेरिका को सेंट मार्टिन द्वीप देने से इनकार कर दिया था और इसके चलते उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी।

उन्होंने लिखा, “जब अमेरिका ने सेंट मार्टिन द्वीप मांगा तब मेरे पिता ने इनकार कर दिया। उन्हें अपनी जान देनी पड़ी। मैं सत्ता में बने रहने के लिए देश को बेचने की कल्पना भी नहीं कर सकती। जिस देश की आजादी के लिए 30 लाख लोगों ने जान दी, उसे कोई एक इंच भी किसी को कैसे दे सकता है?”

आतंकियों के सहारे सत्ता पर काबिज: शेख हसीना
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि यूनुस ने आतंकवादियों और प्रतिबंधित संगठनों की मदद से सत्ता हथियाई है। उन्होंने कहा, “उन्होंने आतंकियों की मदद से सत्ता छीनी है। जिन आतंकवादियों से हमने बांग्लादेश के लोगों को बचाया, आज वही खुली छूट में हैं। जेलें खाली कर दी गई हैं और सभी को छोड़ दिया गया है। अब बांग्लादेश पर आतंकियों का राज है।”

अवामी लीग पर प्रतिबंध को बताया असंवैधानिक
शेख हसीना ने अपनी पार्टी अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार को संविधान से छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारे संविधान की नींव मुक्ति संग्राम और संघर्ष से बनी है। यह अवैध सत्ता हथियाने वाले व्यक्ति कौन होते हैं, जो संविधान से छेड़छाड़ करें? उनके पास जनमत नहीं है, न ही संवैधानिक आधार। जिस पद पर वह बैठे हैं, उसका कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है। संसद के बिना कानून बदलना पूर्ण रूप से अवैध है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में बांग्लादेश की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल का संकेत हो सकता है। यूनुस और हसीना के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है और इससे चुनावी प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

 

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