बीजिंग
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रही जंग के बीच संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर बीते कुछ सालों से लगातार सवाल उठे हैं। संयुक्त राष्ट्र कई मोर्चों पर विफल रहा है और विशेषज्ञ लंबे समय से इसके ढांचे और कार्यशैली में बदलाव की मांग भी कर रहे हैं। इस बीच चीन ने UN को सीधी चुनौती देते हुए एक नया मंच तैयार कर लिया है। हाल ही में चीन ने दुनिया के कई बड़े देशों के साथ मिलकर नया वैश्विक मध्यस्थता समूह बनाया है।
चीन की इस कवायद में शुक्रवार को 30 से अधिक देश शामिल हुए हैं। पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बेलारूस और क्यूबा के 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने हांगकांग में “अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता संगठन की स्थापना संधि” पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद ये देश इस वैश्विक संगठन के संस्थापक सदस्य बन गए। इस नए संगठन का मुख्यालय हांगकांग में होगा। मुख्यालय की स्थापना के समारोह में संयुक्त राष्ट्र सहित लगभग 50 अन्य देशों और लगभग 20 संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
चीन ने बताया क्या है उद्देश्य
इस दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन लंबे समय से आपसी समझ की भावना से मतभेदों को निपटाने और बातचीत के माध्यम से आम सहमति बनाने की वकालत करता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन का लक्ष्य राष्ट्रों के बीच संघर्षों को सुलझाने के लिए चीनी प्रज्ञता प्रदान करना है। उन्होंने कहा है कि इस निकाय का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देना औरअधिक सामंजस्यपूर्ण वैश्विक संबंध बनाना है।
कब तक शुरू करेगा काम?
बीजिंग ने इस संगठन को मध्यस्थता के माध्यम से विवादों को सुलझाने वाला दुनिया का पहला अंतर-सरकारी कानूनी संगठन बताया है और कहा है कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण तंत्र होगा। वहीं हांगकांग के नेता जॉन ली ने कहा है कि संगठन इस साल के अंत तक अपना काम शुरू कर सकता है।
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