ईरान
पोप लियो 14वें (Pope Leo XIV) ने ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर गहरी चिंता जताई है और दोनों देशों से संयम और समझदारी से काम लेने की अपील की है। यह उनकी पांच हफ्ते के कार्यकाल के दौरान शांति के लिए अब तक की सबसे सशक्त अपील मानी जा रही है। सेंट पीटर्स बेसिलिका (St. Peter’s Basilica) में आयोजित एक जुबली समारोह में बोलते हुए पोप लियो ने कहा, "इतने नाजुक समय में, मैं ज़िम्मेदारी और विवेक की ओर लौटने की अपील करता हूं।" उन्होंने कहा कि इस संकट के समय दुनिया को परमाणु हथियारों की धमकी से मुक्त एक सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने की ज़रूरत है और इसके लिए सभी देशों को 'सम्मानजनक संवाद' और 'ईमानदार प्रयास' करने होंगे।
पोप ने ज़ोर देते हुए कहा कि “एक स्थायी शांति केवल न्याय, भाईचारे और साझा भलाई की बुनियाद पर ही बन सकती है। कोई भी देश किसी अन्य के अस्तित्व को कभी भी खतरे में नहीं डालना चाहिए।” पोप लियो ने सभी देशों से शांति की दिशा में पहल करने, मेल-मिलाप के रास्ते तलाशने और सभी लोगों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने वाले समाधान खोजने की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। इस अपील से कुछ ही घंटे पहले इज़राइल ने ईरान के कुछ प्रमुख रक्षा केंद्रों पर ताजा हवाई हमले किए। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी ईरान में एक मिसाइल साइट पर हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गई।
वहीं, ईरान ने भी प्रतिक्रिया में मिसाइलें दागीं, जिसमें इज़राइल के रिशोन लेज़ियन शहर के निवासी 73 वर्षीय यिसराएल अलोनी की मौत हो गई। ईरान की पुलिस ने यज़्द प्रांत में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिन पर इज़राइल के लिए जासूसी करने का आरोप है। पोप लियो की यह अपील ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। उनकी इस शांति की पुकार को दुनियाभर में एक नैतिक आह्वान के रूप में देखा जा रहा है।
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