चंडीगढ़
हरियाणा सरकार राज्य के तीन जिलों चरखी दादरी, फतेहाबाद और पंचकूला में नई जिला जेलों का निर्माण कराएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन तीनों जेलों के निर्माण पर कुल ₹284 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इससे प्रदेश में करीब 4,000 अतिरिक्त बंदियों को रखने की क्षमता विकसित होगी।
हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन को सौंपी गई जिम्मेदारी
इन जेलों का निर्माण कार्य हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा किया जाएगा, जिसके लिए शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। वर्तमान में राज्य में तीन केंद्रीय जेल और 17 जिला जेलें संचालित हैं, जिनकी कुल बंदी क्षमता 22,647 है। बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यह क्षमता अपर्याप्त मानी जा रही है।
इन गांवों में बनेंगी नई जेलें
जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के अनुसार, तीन नई जिला जेलें निम्नलिखित स्थानों पर बनाई जाएंगी।
चरखी दादरी: गांव भैरवी
फतेहाबाद: गांव बीघड़
पंचकूला: गांव जलोली
जेल परिसरों में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
जिलेवार विवरण
1. चरखी दादरी (भैरवी गांव)
अनुमोदित बजट: ₹97.73 करोड़
क्षेत्रफल: 58 एकड़
बंदी क्षमता: 1,150
प्रमुख सुविधाएं:
पुरुष बंदियों के लिए 7 बैरक
महिला बंदियों के लिए 1 बैरक
2 सुरक्षा सेल, 30-बेड का अस्पताल
प्रशासनिक भवन, किचन, गोदाम, नियंत्रण कक्ष
जेल फैक्ट्री और आवासीय परिसर
2. फतेहाबाद (बीघड़ गांव)
अनुमोदित बजट: ₹99.97 करोड़
क्षेत्रफल: 45 एकड़
बंदी क्षमता: 1,852
प्रमुख सुविधाएं:
पुरुषों के लिए 12 बैरक
महिलाओं के लिए 1 बैरक
4 विशेष सुरक्षा सेल
30-बेड अस्पताल, जेल फैक्ट्री
कैंटीन, लाइब्रेरी, बहुउद्देश्यीय हॉल
वार्डर हॉस्टल और 115 आवासीय इकाइयां
3. पंचकूला (जलोली गांव)
अनुमोदित बजट: ₹86.17 करोड़
क्षेत्रफल: 31 एकड़
बंदी क्षमता: 954
प्रमुख सुविधाएं:
पुरुषों के लिए 4 बैरक
महिलाओं के लिए 1 बैरक
4 सुरक्षा सेल, 30-बेड का अस्पताल
34 आवासीय इकाइयों का निर्माण
रेवाड़ी में नवनिर्मित जेल का उद्घाटन
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा की उपस्थिति में रेवाड़ी जिले के फिदेडी गांव में 50 एकड़ जमीन पर ₹95 करोड़ की लागत से नवनिर्मित जेल परिसर का उद्घाटन किया है, जिसमें करीब एक हजार बंदियों को रखने की क्षमता है। रेवाडी जेल में इससे पहले सिर्फ 65 बंदियों को रखने की ही व्यवस्था थी, जिसके चलते रेवाडी जिले के बंदियों को गुरूग्राम, नारनौल और झज्जर की जेलों में भेजा जाता था।
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