रांची
झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री आलमगीर आलम द्वारा दायर जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा टेंडर घोटाले में गिरफ्तारी के बाद दाखिल की गई थी।
पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलम, जो पाकुड़ से चार बार विधायक रह चुके हैं, 15 मई 2024 से हिरासत में हैं। उन पर ईडी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मनचाही कंपनियों को ठेके दिलवाए और इसके बदले कमीशन लिया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने की, जिन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
करोड़ों की नकदी बरामदगी से जुड़े हैं गंभीर आरोप
जांच की शुरुआत ग्रामीण विकास विभाग के मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी से हुई, जिन्हें ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पकड़ा था। इसके बाद ईडी ने दिल्ली, रांची, पटना और जमशेदपुर में राम और अन्य अभियंताओं के ठिकानों पर छापेमारी की।
ईडी ने आलम के निजी सचिव संजीव लाल और उनके सेवक जहांगीर आलम के आवासों पर भी छापे मारे। जहांगीर के घर से ₹32 करोड़ नकद बरामद किए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह रकम आलमगीर आलम से जुड़ी है और इसे कर्मचारियों के घरों में छुपाकर रखा गया था।
जांच के बाद ईडी ने आलम को पूछताछ के लिए बुलाया और फिर हिरासत में ले लिया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। अब झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका पर दिए जाने वाले निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
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