लुधियाना
हल्का वेस्ट के उप चुनाव में हार के बाद फिर अकाली – भाजपा गठबंधन की चर्चा शुरू हो गई है क्योंकि अकाली – भाजपा लंबे समय तक केंद्र व राज्य की राजनीति में इकट्ठे रहे हैं और सरकार भी बनाई लेकिन कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने भाजपा का साथ छोड़ दिया और उसके बाद से दोनों पार्टियां अलग अलग चुनाव लड़ रही है, लेकिन इस दौरान अकाली – भाजपा को कोई सफलता नहीं मिली।
बल्कि अकाली – भाजपा एक के बाद एक चुनाव हारने की वज़ह से पंजाब की सियासत के हाशिए पर जा रहे हैं।यहीं हाल हल्का वेस्ट के उप चुनाव में देखने को मिल रहा है जब अकाली – भाजपा तीसरे और चौथे नंबर पर सीमित होकर रह गए हैं, जिसके बाद से एक बार फिर अकाली भाजपा गठबंधन की चर्चा सुनने को मिल रही है। क्योंकि अकाली – भाजपा के वोट का आंकड़ा 30 हजार से पार हो गया है, जिसके मद्देनजर सियासी गलियारों में चर्चा हो रही है कि अगर अकाली – भाजपा इकट्ठे हो तभी 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की जा सकती है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर अंदरखाते क़वायद काफी देर से चल भी रही है, लेकिन अकाली दल की गुटबाजी के चलते भाजपा हामी नहीं भर रही है।
जैसा कि पंजाब केसरी द्वारा पहले ही साफ कर दिया गया था कि हल्का वेस्ट के उप चुनाव में अकाली दल को अब तक की सबसे शर्मनाक हार का सामना करना पड़ सकता है। उस खबर पर मोहर लग गई है और करीब 8 हजार वोट के साथ अकाली दल चौथे नंबर पर आया है।यहां तक 2022 के विधानसभा चुनाव से भी 2000 वोट डाउन हो गए हैं, क्योंकि उस समय महेश इंद्र ग्रेवाल को 10 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।
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