अनिल अंबानी की रिलायंस कम्‍युनिकेशन कंपनी के लोन अकाउंट को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने तगड़ा झटका दिया

बिज़नेस

मुंबई 

 उद्योगपति अनिल अंबानी की रिलायंस कम्‍युनिकेशन कंपनी के लोन अकाउंट को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने तगड़ा झटका दिया है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने उसके लोन खाते को 'धोखाधड़ी' कैटेगरी में डाल दिया.

गौर करें तो स्‍टॉक एक्‍सचेंज फाइलिंग में Reliance Communications कंपनी ने कहा कि SBI ने अगस्‍त 2016 से क्रेडिट सुविधाओं के संबंध में रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के खिलाफ उसके लोन खाते को 'धोखाधड़ी' कैटेगरी में डाला है. जबकि रिलायंस कम्‍युनिकेशंस दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत दिवालियापन की कार्यवाही से गुजर रही है.

रिलायंस कम्युनिकेशंस ने मंगलवार को कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने उसके लोन खाते को 'धोखाधड़ी' कैटेगरी में डाल दिया है. अनिल अंबानी के वकील ने कहा कि एसबीआई द्वारा आरकॉम को 'धोखाधड़ी' करार देना आरबीआई के नियमों और अदालती आदेशों का उल्लंघन है.

बता दें कि उद्योगपति अनिल अंबानी के वकीलों ने दिवालिया रिलायंस कम्युनिकेशंस के ऋण खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक को पत्र लिखा है.

उन्होंने कहा कि इस कदम ने आरबीआई के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ अदालत के निर्देशों का भी उल्लंघन किया है. 2 जुलाई को लिखे पत्र में वकील ने कहा कि एसबीआई का आदेश चौंकाने वाला है. और इसे एकतरफा पारित किया गया है. इसके साथ ही ये प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है.

वकील ने कहा कि एसबीआई का आदेश सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णयों के साथ-साथ आरबीआई के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है.

आरकॉम ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी गई फाइलिंग में कहा कि एसबीआई 2016 के एक मामले में कथित तौर पर फंड के डायवर्जन का हवाला देते हुए उसके ऋण खाते को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत कर रहा है.

वकील ने पत्र में कहा कि एसबीआई ने कारण बताओ नोटिस (एससीएन) की अमान्यता के बारे में अंबानी के संचार का लगभग एक साल तक जवाब नहीं दिया है. इसके साथ ही बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद अपने निर्णय का आधार बनने वाली जानकारी भी प्रदान नहीं की है.

वकील ने कहा कि एसबीआई ने अंबानी को अपने आरोपों के खिलाफ दलीलें पेश करने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया.

गौर करें तो एसबीआई ने आरकॉम के अन्य गैर-कार्यकारी और स्वतंत्र निदेशकों को कारण बताओ नोटिस वापस ले लिया है. वकील ने कहा कि अंबानी भी गैर-कार्यकारी निदेशक थे और आरकॉम के दिन-प्रतिदिन के मामलों में शामिल नहीं थे.

वकील ने कहा कि उन्हें गलत तरीके से इस श्रेणी में रखा गया है. उन्होंने कहा कि अंबानी कानूनी सलाह के मुताबिक मामले को आगे बढ़ा रहे हैं.

"बैंक का 20 दिसंबर, 2023 का एससीएन 15 जुलाई, 2024 के संशोधित आरबीआई मास्टर निर्देशों से पहले जारी किया गया था. यह निर्देश उन निर्देशों को पूरी तरह से बदल देता है, जिनके तहत एससीएन जारी किया गया था. और जो अब अस्तित्व में नहीं हैं. ऐसे में बैंक को उस एससीएन को वापस लेने की जरूरत होगी.

वकील ने कहा कि "इस कम्युनिकेशन के लिए बैंक की ओर से लगभग एक साल की विस्तारित चुप्पी को देखते हुए हमारे ग्राहक (अंबानी) को यह विश्वास था कि बैंक ने हमारे ग्राहक की स्थिति को स्वीकार कर लिया है. साथ ही मामले को आगे बढ़ाने का इरादा नहीं है."

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