चमड़ा उद्योग बना स्वास्थ्य संकट! कानपुर में 157 लोगों के खून में मिला खतरनाक क्रोमियम

उत्तर प्रदेश राज्य

गोरखपुर
चमड़ा उद्योग से निकलने वाला प्रदूषण कानपुर के लोगों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। लेदर में इस्तेमाल क्रोमियम की चपेट में आने वालों की संख्या में और इजाफा हुआ है। 24 जून को शहर के छह इलाकों के 157 लोगों के खून में भी क्रोमियम तय मानक से अधिक निकला है। शुक्रवार को सैंपल की जारी रिपोर्ट में 20 लोगों में मर्करी (पारा) भी तय मानक से ज्यादा पाया गया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर 24 जून को स्वास्थ्य विभाग ने रूमा, जाजमऊ व पनकी औद्योगिक क्षेत्र, तेजाब मिल का हाता, राखी मंडी, नौरेयाखेड़ा में शिविर लगाया गया था। छह जगह के 177 लोगों का ब्लड सैंपल राममनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ जांच के लिए भेजा गया था। इनमें महिलाएं 102 और पुरुषों की संख्या 75 थी।

सीएमओ ने कहा-शासन के आदेश पर आगे बढ़ाएंगे कदम : सीएमओ डॉ. उदयनाथ ने 24 जून को छह जगह में शिविर लगाकर 177 लोगों के ब्लड सैंपल की रिपोर्ट आने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि राममनोहर लोहिया अस्पताल में जांच के लिए सभी ब्लड सैंपल भेजे गए थे। 157 लोगों में क्रोमियम मानक से अधिक पाया गया है। वहीं 20 लोगों के ब्लड में मर्करी भी तय मानक से अधिक मिला है। अब इन इलाकों को लेकर क्या योजनाएं बननी हैं, इसको लेकर शासन के आदेश का इंतजार है। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है।

क्या बोले विशेषज्ञ
जीएसवीएम मेडिसिन के विभागाध्यक्ष बीपी प्रियदर्शी ने बताया कि ब्लड में क्रोमियम या मर्करी स्तर से अधिक होना खतरनाक है। इससे शरीर के तमाम अहम अंगों के पूरी तरह खराब होने व गंभीर रोगों की चपेट में आने की आशंका काफी बढ़ जाती है।

अगर क्रोमियम अधिक तो इन रोगों का हो सकता है खतरा
-लिवर, किडनी के लिए बेहद खतरनाक
-नसों को नुकसान पहुंचने से सुन्नता और दर्द
-पेट में जलन, मतली, और उल्टी की परेशानी
-हार्ट, त्वचा संबंधी रोग, कैंसर की भी आशंका

हालिया सैंपलिंग रिपोर्ट में खुलासा
-एनजीटी के आदेश पर 6 इलाकों से एकत्र किए थे ब्लड सैंपल
-पारा भी तय मानक से ज्यादा मिला, अब शासन के आदेश का हो रहा इंतजार
-मर्करी का स्तर अधिक होने से इस तरह की दिक्कतें आ सकतीं
-मर्करी जमा होने से गुर्दा फेल होने का डर
-मानसिक रोग को बढ़ावा, याददाश्त कम
-सांस संबंधी समस्याएं, सांस लेने में दिक्कत
-गर्भावस्था में स्तर अधिक तो शिशु को दिक्कत

 

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