परियोजना अधिकारी, ब्लॉक के एपीओ, एसआरएलएम के डीपीएम का हुआ प्रशिक्षण
भोपाल
मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को भोपाल में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के सभी 313 जनपद पंचायत के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, 52 जिलों परियोजना अधिकारी मनरेगा एवं ग्रामीण आजीविका के डीपीएम शामिल हुए। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी सभागार, विकास भवन अरेरा हिल्स, भोपाल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयुक्त मनरेगा-संचालक वाटर शेड मिशन श्री अवि प्रसाद एवं आयुक्त एसआरएलएम श्रीमती हर्षिका सिंह ने अधिकारियों को “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना के बारे में जानकारी दी और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। प्रशिक्षण के दौरान अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना अधिकारी एवं डीपीएम एसआरएलएम को संयुक्त रूप से पारदर्शिता के साथ एक बगिया मां के नाम परियोजना के लिए हितग्राहियों का चयन, परियोजना के उद्देश्य और लाभ के बारे में जानकारी दी। साथ ही अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया और उनके सुझाव भी प्राप्त किए गए।
बैनर का किया विमोचन
राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मनरेगा परिषद द्वारा तैयार कराए गए “एक बगिया मां के नाम’’ प्रोग्राम बैनर का मनरेगा आयुक्त श्री अवि प्रसाद एवं आयुक्त श्रीमती हर्षिका सिंह ने विमोचन किया। एक बगिया मां के नाम परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर अब तक 2100 से अधिक इंजीनियर एवं 600 से अधिक कृषि सखी को तकनीकी रूप से प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री और उपयंत्री (आरईएस एवं मनरेगा), डीपीएम एसआरएलएम शामिल है।
तकनीकी रूप से किया गया दक्ष
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा परियोजना अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) एवं डीपीएम एसआरएल को व्यक्तिगत / फलोद्यान के लिये तैयारी, भूमि चयन, पौधों की प्रजाति चयन, देखभाल, सुरक्षा एवं शतप्रतिशत उत्तरजीविता सुनिश्चित करते हुए वैज्ञानिक तकनीकियों का उपयोग पर पौधरोपण की बारीकियों पर प्रशिक्षण दिया गया। पौधरोपण के कार्य में अत्याधुनिक तकनीक (सिपरी सॉफ्टवेयर) का उपयोग किया जाएगा। पौधे लगाने से पहले जिले की जलवायु, मिट्टी का परीक्षण, एग्रो क्लाइमेट जोन के आधार पर पौधों की प्रजातियों का चयन, स्थल चयन, पानी की उपलब्धता सहित अन्य जरूरी गतिविधियों का पता लगाया जाएगा। साथ ही, अगर सॉफ्टवेयर यह बताता है कि संबंधित जगह पर पौधे नहीं लगाए जा सकते, वहां पौधरोपण नहीं होगा।
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