कटिहार
सीमांचल क्षेत्र में लगातार हो रही भारी मानसूनी बारिश और चक्रवाती मौसम ने तबाही मचा दी है। इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित कोढ़ा प्रखंड हुआ है, जिसे ‘केलांचल’ के नाम से जाना जाता है। केला उत्पादन के लिए मशहूर इस इलाके में करीब 500 से 600 एकड़ जमीन पर केले की खेती होती है।
सावन की शुरुआत के साथ ही किसान अपनी तैयार फसल को बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन आसमान से बरसी आफत ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में पानी भर जाने से पेड़ टूट गए और फसलें सड़ने लगीं। किसानों के मुताबिक तैयार फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गई है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय किसान प्रशांत कुमार चौधरी का कहना है कि हमने पूरे साल मेहनत की थी, लेकिन अब न खेत में कुछ बचा है और न ही जेब में। सरकार को हमारी सुध लेनी चाहिए।” वहीं, किसान अर्जुन प्रसाद ने प्रशासन से फसल क्षति का सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग की है।
ग्रामीण स्तर पर नुकसान का आकलन शुरू हो गया है, लेकिन किसान इसे नाकाफी मान रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक राज्य सरकार विशेष राहत पैकेज की घोषणा नहीं करती, तब तक उनकी हालत में सुधार मुश्किल है।
गौरतलब है कि सीमांचल में केला एक नकदी फसल के रूप में देखा जाता है और हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। अब देखना यह होगा कि क्या राज्य सरकार इन प्रभावित किसानों की पुकार सुनेगी या यह आवाज भी अन्य समस्याओं की तरह सरकारी फाइलों में ही दबकर रह जाएगी।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
