क्रूरता की हद पार करने वाला वांटेड नक्सली योगेंद्र गंझू पकड़ाया, तीन अन्य भी पकड़े गए

राज्य

रांची

छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। जवान का पेट फाड़ कर बम प्लांट करने वाले नक्सली योगेंद्र गंझू उर्फ पवन गंझू को झारखंड पुलिस ने गिरफ्तार किया है। नक्सली योगेंद्र गंझू के अलावे तीन अन्य नक्सलियों को भी पुलिस ने पकड़ा है।

दरअसल झारखंड में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के एक कर्मचारी से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। इस धमकी के पीछे भाकपा (माओवादी) के कोयल-शंख जोन कमेटी का नाम सामने आया था। धमकी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार कुख्यात नक्सलियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार नक्सलियों में योगेंद्र गंझू उर्फ पवन गंझू भी शामिल है, जो कई गंभीर अपराधों में वांछित था। इसने एक जवान की शहादत के बाद उसका पेट फाड़ दिया था और बम प्लांट कर दिया था।

नक्सलियों को गिरफ्तार करने के लिए रांची एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा ने एक विशेष टीम का गठन किया था। गुप्त सूचना के आधार पर खलारी थाना क्षेत्र के बक्सी बंगला चट्टी नदी इलाके में की गई घेराबंदी के दौरान चार कुख्यात नक्सलियों को गिरफ्तार किया। इनमें योगेंद्र गंझू उर्फ पवन गंझू, मुकेश गंझू, राजकुमार नाहक और मनु गंझू शामिल हैं। इनके पास से एक लोडेड देशी पिस्तौल, तीन जिंदा कारतूस और अन्य आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गईं है।

25 जून को मांगी थी एक करोड़ की रंगदारी
25 जून 2025 को सीसीएल के महाप्रबंधक कार्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी को भाकपा माओवादी संगठन के नाम पर एक करोड़ रुपये की रंगदारी की धमकी दी गई थी। इस मामले में पीड़ित ने खलारी थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची ग्रामीण एसपी के निर्देशन में खलारी डीएसपी के नेतृत्व में छापेमारी टीम बनाई थी।

कौन है योगेंद्र गंझू उर्फ पवन गंझू?
गिरफ्तार नक्सली योगेंद्र गंझू उर्फ पवन झारखंड के कई जिलों में दर्जनों गंभीर मामलों में वांछित रहा है। वर्ष 2013 में लातेहार के गारू थाना क्षेत्र के कटिया जंगल में माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में एक पुलिस जवान की शहादत के बाद उस पर जवान के शरीर में बम प्लांट करने का आरोप भी है। योगेंद्र ने जवान का पेट फाड़ कर बम प्लांट किया था।

वहीं वर्ष 2006 में संगठन से जुड़ा और गारू-सरयू क्षेत्र का एरिया कमांडर बना था। 2009 में वह सब-जोनल कमांडर बना. 2012 में वह गिरफ्तार हो गया, लेकिन बाद में संगठन से दूरी बना ली थी। आर्थिक तंगी के कारण फिर से संगठन में शामिल हुआ और व्यवसायियों, ठेकेदारों, कोयला कारोबारियों से रंगदारी वसूलने लगा। इसी कड़ी में पवन और उसके साथियों ने सीसीएल के कर्मी से एक करोड़ रुपये की रंगदारी की डिमांड की थी।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry