नईदिल्ली
एक दशक पहले भारत ने साफ कह दिया था कि M1 Abrams टैंक हमारे किसी काम का नहीं है. वजह भी बहुत सीधी थी. इस टैंक का भारी-भरकम होना. रखरखाव में झंझट, ईंधन की ज्यादा खपत, और भारत के पहाड़ी इलाके में ऑपरेशन के लिहाज से बिल्कुल भी फिट नहीं. भारत ने तब T-90 टैंक और स्वदेशी अर्जुन टैंक को ज्यादा बेहतर विकल्प माना था. अब वही बात अमेरिका की मरीन कॉर्प्स ने भी मान ली है. साफ कह दिया कि M1 Abrams टैंक किसी काम के नहीं हैं.
नेशनल इंट्रेस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स ने बड़ा ऐलान किया कि अब वे M1 Abrams टैंक नहीं चलाएंगे. इस बदलाव के पीछे था उनका 10 साल का ट्रांसफॉर्मेशन प्लान. मरीन कॉर्प्स ने तय किया कि उन्हें फिर से समुद्री युद्ध की ओर लौटना है, ना कि दूसरी थल सेना बनना है. और इसके लिए सबसे पहले उन्होंने अपने 1300 टैंक हटा दिए.
भारत ने पहले ही क्यों मना किया था?
M1 Abrams बहुत भारी था, जो कि भारत के पहाड़ी और रेतीले इलाकों में चलाना मुश्किल था. इसका मेंटेनेंस भी बहुत महंगा और जटिल था, खासतौर पर जब भारत जैसे देश में लॉजिस्टिक्स की चुनौती बड़ी हो. तेल बहुत पीता था, जिससे लंबी दूरी तक ऑपरेशन करना भारी पड़ता. इसके मुकाबले T-90 हल्का, तेज और सस्ता था, और भारतीय सेना की ज़रूरतों के ज्यादा करीब था. साथ ही भारत ने अपने अर्जुन टैंक को विकसित करना भी जारी रखा, जो अब काफी हद तक उन्नत हो चुका है.
अब अमेरिका क्या सोच रहा है?
अब जब M1 Abrams टैंक हट चुके हैं, तो अमेरिका के कुछ अफसर M10 Booker टैंक को अपनाने की बात कर रहे हैं. यह टैंक हल्का है और मौजूदा जरूरतों के मुताबिक ज्यादा फुर्तीला भी.
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