निमिषा प्रिया मामला: बचाव के प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब

देश

नई दिल्ली
यमन में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के परिजन उनके बचाव में जुटे हैं। अब तक इसे लेकर कोई गुड न्यूज नहीं मिल सकी है, जबकि कई सामाजिक संस्थाएं भी इसमें ऐक्टिव हैं। इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। अदालत में केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल निमिषा की सजा को स्थगित कर दिया गया है। उन्हें बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि हम चाहते हैं कि निमिषा प्रिया सकुशल भारत लौट आएं। इस बीच याचिकाकर्ता ने ब्लडमनी के सवाल पर कहा कि पहले तो उन्हें माफी मिल जाए। उसके बाद ही ब्लडमनी की बात होगी।

केंद्र सरकार के प्रयासों और उसके जवाब से अदालत भी संतुष्ट दिखी। बेंच ने अब इस केस की अगली सुनवाई 14 अगस्त को करने का फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स की सरकार हर संभव मदद कर रही है। बता दें कि निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में सजा-ए-मौत दी जानी थी। केरल के एक ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के माध्यम से सरकार ने मध्यस्थता का एक प्रयास किया था। इसके चलते फिलहाल सजा को टाला गया है। पीड़ित परिवार और निमिषा के परिजनों के बीच डील का मौका इससे मिला है। लेकिन अब तक राहत की खबर का इंतजार ही है।

निमिषा प्रिया को उनके बिजनेस पार्टनर रहे तलाल आबदो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। वहीं निमिषा का पक्ष है कि तलाल आबदो मेहदी उनका उत्पीड़न कर रहा था और उनसे शादी के फर्जी दस्तावेज तक बनवा लिए थे। उनसे बिजनेस में बेजा हक मांग रहा था और उत्पीड़न करते हुए पासपोर्ट तक जब्त कर लिया था। वह पासपोर्ट लेने के लिए ही उससे मिली थीं और उसे ड्रग्स दिया था ताकि मौका पाकर पासपोर्ट ले लें। हालांकि ड्रग्स की ओवरडोज से तलाल की मौत ही हो गई। इसी मामले में निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत दी गई है। हालांकि यमन में ब्लड मनी का एक नियम है, जिसके भरोसे उम्मीद की जा रही है कि उन्हें बचा लिया जाएगा।

 

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