मुंबई
महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा गए हैं। राज्यभर की 30,000 से अधिक नर्सें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई हैं। नर्सों के इस सामूहिक आंदोलन से सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा संस्थानों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
नर्सों की यह हड़ताल महाराष्ट्र राज्य नर्सेज एसोसिएशन के नेतृत्व में की जा रही है। एसोसिएशन का कहना है कि सातवां वेतन आयोग लागू होने के बावजूद वेतन विसंगतियां दूर नहीं की गई हैं, जिससे हजारों नर्सों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे पहले, 15 और 16 जुलाई को मुंबई के आजाद मैदान में राज्यभर से आई नर्सों ने दो दिवसीय धरना प्रदर्शन किया था। प्रशासन से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण अब नर्सों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुना है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार हड़ताल को समाप्त करने के लिए प्रयास कर रही है और जल्द ही नर्सेज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की संभावना है। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की देखभाल के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नर्सिंग स्टाफ की गैरमौजूदगी से सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।
नर्सों की मांगों में वेतन विसंगतियों को दूर करने के अलावा पदोन्नति, कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं और सेवा शर्तों में सुधार जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। हड़ताल कब तक चलेगी, इसका फिलहाल कोई अंदाजा नहीं है।
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