संसद के मॉनसून सत्र में ही आएगा जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव? रिजिजू ने दिया जवाब

देश

नई दिल्ली 
संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। सरकार और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने एजेंडे तैयार कर लिए हैं। इसी सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाने की भी संभावना है। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक बिजनेस एडवाइजरी कमेटी इस मुद्दे को पास नहीं करती और चेयर से मंजूरी नहीं मिल जाती, इस मामले में कोई भी ऐलान करना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि महाभियोग को लेकर सांसदों के हस्ताक्षर हो रहे हैं। 100 से ज्यादा सदस्य इसपर साइन कर चुके हैं।

जस्टिस यशवंत वर्मा वर्तमान में इलाहाबाद हाई कोर्ट में कार्यरत हैं। हालांकि उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है। दिल्ली हाई कोर्ट में जज रहने के दौरान उनके आवास से जली हुए नोटों की गड्डियां मिली थीं। इससे पहले रीजीजू ने शुक्रवार को कहा था कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एकमत हैं। न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से नोटों की जली हुई गड्डियां बरामद हुई थीं।

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के आदेश पर हुई आंतरिक जांच में उन्हें दोषी ठहराया गया है। न्यायमूर्ति वर्मा ने किसी भी गलत कार्य में संलिप्त होने से इनकार किया है, लेकिन सुप्रीम द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला है कि न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्यों का उस स्टोर रूम पर गुप्त या सक्रिय नियंत्रण था, जहां नकदी पाई गई थी। इससे यह साबित होता है कि मामला गंभीर है और उन्हें हटाया जाना चाहिए।

शुक्रवार को इस मामले को लेकर रिजिजू ने भी कहा था कि उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात की है। मैं एकमात्र सांसद वाले कुछ दलों से भी संपर्क करुंगा, क्योंकि मैं किसी भी सदस्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहता। ताकि यह भारतीय संसद की एक संयुक्त राय के रूप में सामने आए।’ केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लाने की पहल सरकार की नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों की है, जिनमें कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामला है, क्योंकि न्यायपालिका ही वह जगह है जहां लोगों को न्याय मिलता है। अगर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, तो यह सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसी कारण न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव सभी राजनीतिक दलों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा।’

 

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