MPPSC परीक्षा प्रक्रिया पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, शेड्यूल में पारदर्शिता की मांग

मध्य प्रदेश राज्य

जबलपुर
 
 मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा और जस्टिस विनस सराफ की युगलपीठ ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मप्र लोक सेवा आयोग (MPPSC) को निर्देश दिए हैं कि वह मुख्य परीक्षा का पूरा कार्यक्रम (शेड्यूल) न्यायालय में प्रस्तुत करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शेड्यूल प्रस्तुत किए जाने के बाद ही मुख्य परीक्षा आयोजन की अनुमति से संबंधित राज्य सरकार के आवेदन पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।

क्या है मामला
भोपाल निवासी सुनीत यादव और अन्य की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि मप्र लोक सेवा आयोग ने 158 पदों के लिए 5 मार्च 2025 को प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी किए, लेकिन इसमें वर्गवार कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहले सभी परीक्षाओं में वर्गवार कट-ऑफ अंक घोषित किए जाते थे, लेकिन इस बार आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों को नजरअंदाज करते हुए यह जानकारी छिपा ली। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि आयोग ने अनारक्षित (ओपन) पदों के विरुद्ध आरक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित नहीं किया। इससे पहले कोर्ट ने निर्देश दिया था कि आयोग वर्गवार कट-ऑफ मार्क्स जारी करे और न्यायालय की अनुमति के बिना मुख्य परीक्षा आयोजित न की जाए।

राज्य सरकार की दलील
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से याचिका में अंतरिम आदेश के तहत लगी रोक हटाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मुख्य परीक्षा के आयोजन पर पूर्ण रोक नहीं लगाई है, लेकिन आयोग को पहले परीक्षा का पूरा कार्यक्रम पेश करना होगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनायक शाह ने पैरवी की। कोर्ट अब 5 अगस्त को अगली सुनवाई करेगा, जिसमें परीक्षा कार्यक्रम और सरकार के आवेदन दोनों पर विचार किया जाएगा।

 

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