खाद्य सुरक्षा पर सवाल: आलू, प्याज और रोटी अब नहीं रहे सुरक्षित – इंटरनेशनल स्टडी का दावा

देश

नई दिल्ली

 जलवायु परिवर्तन देखते-देखते हमारी थाली और जेब तक पहुंचने लगा है. शोधकर्ताओं ने बताया कि क्लाइमेट चेंज के कारण कहीं रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है तो कहीं बाढ़ तो वहीं कुछ जगहें भीषण सूखा या अकाल का सामना कर रही हैं. इसका सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ रहा है. 

खेती कैसे हो रही है प्रभावित?
जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर दुनिया भर में होने वाली खेती पर काफी बुरे तरीके से पड़ रहा है. खेती कम होने के कारण अनाज, फल और सब्जियों के दाम को बढ़ाया जा रहा है. अगर इसी तरह से मौसम बिगड़ता रहा तो आने वाले समय में गरीब देश कुपोषण, राजनीतिक समस्या और समाज में अशांति की समस्या से जूझ रहे होंगे.

किन-किन चीजों के दाम में आया उछाल?
ब्रिटेन की एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलीजेंस यूनिट, European Central Bank, फूड फाउंडेशन और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इमपैक्ट के संयुक्त अध्ययन में 2022 और 2024 के बीच 18 देशों के मौसम का डाटा लिया गया जिसमें पाया गया कि खाने वाली चीजों के दाम में बढ़ोतरी का कनेक्शन गर्मी, सूखा और बारिश से था. शोध से पता चला कि बीते साल ब्रिटेन में आलू, साउथ कोरिया में पत्तागोभी और घाना में कोको के दाम में तेजी से उछाल आया. इनकी वजह असामान्य मौसम था.

खेती करने में क्या आ रही है मुश्किल?
Climate Change ने खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है. लंबे समय तक सूखा पड़ने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं. तेज बहाव के साथ आने वाली बाढ़ ऊपजाऊ मिट्टी को अपने साथ बहा ले जाती है. इसके बाद उस जगह पर सिर्फ ऐसी जमीन रह जाती है जिस पर खेती करना बहुत मुश्किल काम हो जाता है. इसके बाद अनाज की कमी और मंहगाई की वजह से परिवारों को बुनियादी पोषण का खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है. 

आलू-प्याज पर भी खतरा?
इसी शोध में ये भी पाया गया कि साल 2022 के मुकाबले भारत में जून 2024 तक प्याज और आलू के दाम 89 फीसदी तक बढ़े थे. यहीं हाल बाकी देशों का भी है. बता दें कि मोजाम्बिक में जब ब्रेड की कीमत बढ़ी थी तो लोग सड़कों पर उतर आए थे. शोधकर्ता मैक्सिमिलियन कोट्ज ने कहा कि, जब खाने की चीजें महंगी होती हैं तो गरीबों को कम पोषण मिलता है जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ता है. 

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