फैमिली कोर्ट का आदेश: बिना वजह पति को छोड़ा, भरण-पोषण का दायित्व नहीं महिला का

फर्श से अर्श तक

शिवपुरी
कुटुम्ब न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश शालिनी शर्मा सिंह ने अकारण पति का त्याग करने वाली महिला द्वारा लगाई गई भरण-पोषण याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया है कि, वह पढ़ी लिखी महिला है और खुद कमा कर अपना भरण-पोषण कर सकती है।

यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार बैंक कालोनी कलारबाग निवासी बृजेश शिवहरे की 24 वर्षीय बेटी रागिनी उर्फ भूमि की शादी 21 नवम्बर 2021 को ब्यावरा जिला राजगढ़ निवासी खेमचंद्र उर्फ अंकित पुत्र भगवान सिंह शिवहरे के साथ संपन्न हुई थी। रागिनी 16 जुलाई 2022 को अपने पिता के साथ ससुराल से मायके लौट आई। उसका आरोप था कि ससुराल वाले उसे 5 लाख रूपये के दहेज के लिए प्रताड़ित करते हैं, जबकि उसके पिता ने शादी के समय दहेज में आठ लाख रुपये नगद, सोने-चांदी के जेवर व घर-गृहस्थी का सामान दिया था।
 
रागिनी ने कुटुम्ब न्यायालय में इस आधार पर भरण-पोषण का दावा पेश किया कि उसके पास भरण-पोषण का कोई साधन नहीं है और उसका पति एक क्लीनिक, मेडिकल स्टोर व पाल्ट्री फार्म चलाता है एवं साधन संपन्न व्यक्ति है।

खेमचंद ने अपने वकील पंकज आहूजा के माध्यम से न्यायालय को बताया कि रागिनी ने अकारण ही घर छोड़ा है, वह पढ़ी लिखी महिला है जो मायके में बच्चों को ट्यूशन देकर करीब 15 हजार रुपये महीना कमाती है। रागिनी द्वारा उसकी जो आय बताई गई है, वह उतना पैसा नहीं कमाता है। न्यायालय के समक्ष रागिनी ने स्वीकार किया कि वह आय अर्जित करने में सक्षम है। न्यायालय ने समस्त तथ्यों एवं साक्ष्यों पर विचारण उपरांत माना कि आवेदक महिला ने अकारण ही अपने पति का त्याग किया है, वह पढ़ी लिखी है और आय अर्जित कर अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है। ऐसे में भरण-पोषण प्राप्त करने की अधिकारी नहीं है। 

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