वाशिंगटन
पाकिस्तान एक बार फिर अपनी चालबाज़ी से न सिर्फ भारत के खिलाफ, बल्कि अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। ताज़ा खुलासे में सामने आया है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी अरबपति परिवार से रिश्ते मजबूत कर, डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को भारत-विरोधी मोड़ देने की साजिश रची। इस नेटवर्क के केंद्र में है एक शख्स जैकरी विटकॉफ जो ट्रंप के बेहद करीबी और उनके कारोबारी सर्कल का अहम चेहरा है।
सूत्रों के मुताबिक, जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था, तभी जैकरी विटकॉफ इस्लामाबाद पहुंचे। वहां उनका स्वागत सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक-पॉलिटिकल डील का हिस्सा था। दरअसल, पाकिस्तान ने हाल ही में वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) नामक क्रिप्टोकरेंसी वेंचर के साथ करार किया, जिसमें ट्रंप परिवार की 60% हिस्सेदारी बताई जा रही है। यही नहीं, इस सौदे से पहले WLF के शीर्ष प्रतिनिधि के तौर पर जैकरी विटकॉफ ने इस्लामाबाद में असीम मुनीर और शहबाज शरीफ से मुलाकात की।
यह डील पाकिस्तानी "क्रिप्टो काउंसिल" के जरिए हुई, जिसे अप्रैल में जल्दबाजी में लॉन्च किया गया और जिसमें Binance के फाउंडर चांगपेंग झाओ (CZ) को सलाहकार बनाया गया। दावा है कि पाकिस्तान इस सौदे के जरिए खुद को "साउथ एशिया की क्रिप्टो कैपिटल" के रूप में स्थापित करना चाहता है, जबकि असली मकसद है अमेरिकी सत्ता के गलियारों में अपनी पकड़ मजबूत करना। खास बात यह है कि WLF में डोनाल्ड ट्रंप के दोनों बेटे एरिक ट्रंप और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ उनके दामाद जैरेड कुश्नर भी हिस्सेदार हैं। यानी पाकिस्तान ने जैकरी विटकॉफ को मोहरा बनाकर सीधे ट्रंप परिवार तक पहुंच बनाई और अब इसी नेटवर्क के जरिए अमेरिकी विदेश नीति में भारत-विरोधी झुकाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
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