कृष्ण भक्तों की अनोखी परंपरा: इस मंदिर में रात नहीं, दिन में होती है जन्माष्टमी

राज्य

जयपुर

छोटी काशी के नाम से मशहूर गुलाबी शहर जयपुर आज कृष्ण भक्ति से सराबोर है। जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी के मंदिर में आज दिन भर भगवान के विग्रह के दर्शन होंगे। मंदिर आने वाले दर्शनार्थियों के लिए आज विशेष व्यवस्था की गई है। इसमें दर्शन के लिए चार अलग-अलग लाइनें बनाई गई हैं।  इनमें पासधारक, बिना जूते-चप्पल वाले आमजन, जूता-चप्पल पहने आमजन और जगमोहन श्रेणी शामिल हैं। शहर के अन्य मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना का आयोजन किया जा रहा है।

लेकिन सबसे खास है चौड़ा रास्ता स्थित राधा-दामोदर जी का मंदिर। इसकी वजह है कि यहां पिछले 300 वर्षों  से कृष्ण जन्माष्टमी मध्य रात्रि को नहीं बल्की दिन में 12 बजे मनाई जा रही है। आज भी परंपरा अनुसार दिन के समय ही जन्माष्टमी की पूजा की गई। मंदिर पुजारी मलय गोस्वामी ने बताया कि उत्सव की शुरुआत सुबह 5:30 बजे मंगला आरती से हुई। इसके बाद श्रृंगार दर्शन सुबह 7:30 से 10:30 बजे तक रहे। सुबह 11 बजे जन्म व्रत कथा हुई और दोपहर 12 बजे से जन्मोत्सव आरंभ हुआ।

21 तोपों की की सलामी दी
जन्मोत्सव कार्यक्रम के दौरान जगमोहन में विशेष झांकी सजाई गई। ठाकुर जी का सर्व सिद्धि, पांचगव्य और पंचामृत से अभिषेक किया गया, जो करीब 1 घंटे तक चला। झांकी में माखन-मिश्री, धनिए की पंजीरी और छप्पन भोग सजाए गए। दोपहर 1:30 बजे महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। जन्मोत्सव पर ठाकुर जी को झूले में विराजमान किया गया और उन्हें पीले रंग की नई अधिवास पोशाक धारण कराई गई। मंदिर परिसर के बाहर आतिशबाजी हुई और 21 तोपों की सलामी दी गई। वहीं जिया बैंड की प्रस्तुति ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry