हरियाणा
हरियाणा के नारनौल में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। दरअसल, गांव नूनी कलां के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में पहली कक्षा के 6 साल के छात्र को स्कूल में बंद कर दिया। छुट्टी होने पर स्कूल का स्टाफ कमरों और गेट पर ताला लगाकर घर ले गए। बच्चे के रोने की आवाज की सुनने के बाद ग्रामीण स्कूल पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में स्कूल स्टाफ ने बच्चे को बाहर निकाला। वहीं स्कूल स्टाफ ने ग्रामीणों से माफी मांगी।
जानकारी के अनुसार गांव नूनी कलां के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में पहली कक्षा में पढ़ने वाले छह वर्षीय बच्चे कमल को स्कूल में नींद आ गई और वह डेस्क पर सो गया। 2 बजे स्कूल में छुट्टी हो गई। इसके बाद सहपाठी भी उसे सोता छोड़कर घर चले गए। इसके बाद किसी का उसकी तरफ ध्यान नहीं गया। इसके बाद सफाई का काम करने वाली महिला कर्मचारी स्कूल को बंद करके चली गई।
इसके बाद बच्चे की आंख खुली तो वह रोने और चिल्लाने लगा। इसकी रोने की आवाज स्कूल के पास से गुजर रहे ग्रामीण ने सुनी, जिसके बाद वह दीवार फांदकर स्कूल में पहुंचा और बच्चे को कमरे में बंद पाया। इसके बाद उसने बच्चे को खिड़की के पास बुलाकर पानी पिलाया और रोने से चुप कराया।
इसके बाद ग्रामीण ने इसकी सूचना पुलिस, सरपंच और बच्चे के परिजनों को दी। पुलिस और सरपंच ने स्कूल स्टाफ को बुलाकर गेट खुलवाया और छात्र को बाहर निकाला। इसके बाद मौके पर पहुंचे परिजनों को बच्चे को सौंप दिया। परिजनों ने स्कूल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है। दूसरी ओर आज स्कूल में पंचायत बुलाई गई, जिसमें स्कूल स्टाफ ने ग्रामीणों से माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती न होने देने का वादा भी किया। बता दें बच्चे के माता-पिता यूपी के रहने वाले है और नारनौल में रहकर मजदूरी करते है।
राजकीय प्राइमरी स्कूल नूनी कलां के हेड मास्टर सोमदत्त ने बताया कि बच्चे को नींद आ गई थी। इसलिए वह कुछ देर के लिए स्कूल में बंद रह गया। सूचना मिलते ही बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया था। बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। वहीं, सरपंच प्रतिनिधि ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह कार्यक्रम के बाद हेड मास्टर और अन्य स्टाफ को इस बारे में चेतावनी दे दी गई है। स्टाफ ने भी अपनी गलती मानी है।
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