लखनऊ
जिलाधिकारियों की तैनाती में योगी सरकार पर लगे जातिवादी होने के आरोप निराधार हैं. 2017 में यूपी की सरकार बदली और सीएम बने गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ यूं तो योगी आदित्यनाथ एक संत हैं, लेकिन क्षत्रिय परिवार में जन्म होने के कारण उन्हें क्षत्रिय के रूप में भी देखा जाता है. उनके विरोधी उन्हें ठाकुरवादी कहते हुए उन्हें घेरते रहते हैं. इसके लिए सबसे जरूरी विपक्ष के उन आरोपों की हकीकत जानना था, जिसमें योगी आदित्यनाथ को ठाकुरवादी बताया जाता है. सार्वजानिक मंचों पर भी सपा मुखिया अखिलेश यादव ये आरोप लगाते रहे हैं.
सबसे पहले यूपी के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों की लिस्ट खंगाली और इसकी पड़ताल की. यूपी के 75 जिलों में सिर्फ 12 जिलों के डीएम ठाकुर हैं. ऐसे में अगर जातिगत अनुपात की बात करें तो यह आंकड़ा 16 फीसदी है, जबकि सपा सरकार में भी यूपी में 12 से 14 के बीच में ठाकुर जिलाधिकारी तैनात थे और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे. सूबे में ब्राम्हण वर्ग से आने वाले डीएम कितने हैं, क्योंकि गाहे-बगाहे मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ पर ब्राम्हण विरोधी होने का भी आरोप लगता है. हमारी पड़ताल में सामने आया कि यूपी के 75 जिलों में 19 जिलों के जिलाधिकारी ब्राम्हण हैं, जबकि अखिलेश यादव की सरकार में यह संख्या 12 से 14 के बीच में था. अगर आनुपातिक आंकड़ों की बात करें तो यह आकड़ा तकरीबन 25.5% है. यूपी के 75 जिलों में 21 जिलों के डीएम पिछड़ा वर्ग-अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं. इसमें कई अधिकारियों के पास बड़े महानगरों की भी कमान है. जबकि, अखिलेश यादव की सरकार में भी यह आकड़ा इसी के आसपास था.
यूपी के 11 जिलों के जिलाधिकारी अनुसूचित जाति एवं जनजाति से आते हैं, जबकि अखिलेश यादव की सरकार में यह आकड़ा इससे भी कम था. यूपी के 11 जिलों के डीएम सामान्य वर्ग से आते हैं, 75 जिलों में ब्राम्हण जिलाधिकारियों की संख्या 25.5 फीसदी है. क्षत्रिय जिलाधिकारियों की संख्या 16 फीसदी है. वहीं ओबीसी वर्ग से जुड़े जिला अधिकारियों की संख्या लगभग 29 फीसदी है. एससी और एसटी से जुड़े जिलाधिकारियों की संख्या 14.5 फीसदी और अन्य सामान्य वर्ग जैसे (कायस्थ, वैश्य आदि) के जिलाधिकारियों की संख्या 14.5 फीसदी है. ऐसे में योगी सरकार जिलाधिकारियों की तैनाती में आरक्षण के अनुपात को भी लगभग पूरा करती हुई दिख रही है.
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