महाभियोग की आहट! ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच विपक्ष ने घेरा मुख्य चुनाव आयुक्त को

राज्य

नई दिल्ली

विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, कई विपक्षी दल इस बात पर मंथन कर रहे हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ वाले आरोप और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के लगातार विरोध के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी.

कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की संभावना पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि इस विषय पर पार्टी के भीतर अभी तक कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो नियमों के अनुसार कांग्रेस महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है.

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चुनाव आयोग ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि उस पर लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ जैसे झूठे आरोपों से न तो आयोग डरता है और न ही मतदाता. आयोग ने लोगों से अपील की कि वे संविधान में मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए हर हाल में मतदान करें. साथ ही कहा कि राजनीतिक दलों का पंजीकरण चुनाव आयोग ही करता है और उसकी नजर में न कोई पक्ष है, न विपक्ष है, सभी समकक्ष हैं.

मुख्य चुनाव आयुक्त ने दिए आरोपों के जवाब

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ऐसे झूठे आरोपों का असर न आयोग पर होगा, न ही मतदाताओं पर. चुनाव आयोग निडर होकर और निष्पक्षता से काम करता रहेगा. उन्होंने दोहराया कि आयोग का काम राजनीति करने वालों से प्रभावित हुए बिना सभी मतदाताओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है.

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को लेकर विपक्ष के आरोपों पर सख्त रुख अपनाते हुए आयोग ने जानकारी दी कि अब तक 28,370 मतदाता अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं. इसके लिए समयसीमा 1 अगस्त से 1 सितंबर तक तय की गई है.

SIR के खिलाफ विपक्ष ने खोला मोर्चा

बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक चार महीने पहले चुनाव आयोग ने राज्य की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया है, जिसका विपक्षी दल कड़ा विरोध कर रहे हैं. इस मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र में भी बहस छिड़ गई है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है.

चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो और सभी संदिग्ध या अपात्र व्यक्तियों के नाम सूची से हटाए जाएं. लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इस कदम से दस्तावेजों की कमी के कारण करोड़ों पात्र मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए करीब 65 लाख नामों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे और साथ ही यह भी बताए कि किन कारणों से उन्हें हटाया गया. आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह इस पर अमल करेगा.

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