MP में किसानों के पैसों का गलत उपयोग, CAG ने दी चौंकाने वाली रिपोर्ट

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल

मध्य प्रदेश में किसानों के लिए जारी किए जाने वाले फंड में घपलेबाजी की बात सामने आई है। यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने गुरुवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में किया। कैग के मुताबिक किसानों के कल्याण के लिए बनाया गया उर्वरक विकास कोष, सरकारी अधिकारियों की कारों के लिए एक तरह का ईंधन टैंक बन गया है। यानी जो पैसा किसानों के हित में खर्च होना था, उसका इस्तेमाल अधिकारियों की गाड़ी में ईधन भरने, ड्राइवरों के वेतन देने जैसे खर्चों में इस्तेमाल हुआ है।

किसानों के फंड से 4.79 करोड़ रुपये का घोटाला

आंकड़ों को विस्तार से समझिए। साल 2017-18 से 2021-22 तक, तीन राज्य सरकारों में 5.31 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया। इस फंड का 90 फीसदी यानी 4.79 करोड़ रुपये राज्य और ज़िला स्तर पर सरकारी गाड़ियों, ड्राइवरों के वेतन और रखरखाव पर खर्च किया गया। इस तरह किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के दौरान फर्टिलाइजर में मिलने वाली सब्सिडी, ट्रेनिंग या खेती से जुड़ी मशीनें खरीदने जैसे लाभ पर केवल 5.10 लाख रुपये ही खर्च हुए हैं।

20 वाहनों पर हुआ 2.25 करोड़ रुपये का खर्च

अकेले राज्य स्तर पर 2.77 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें केवल 20 वाहनों पर 2.25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई। कैग ने ज़ोर देकर कहा कि उर्वरक विकास कोष (एफडीएफ) का मूल उद्देश्य किसानों को जरूरी सहायता मुहैया करना, पीएसीएस यानी लोन देने वाली समितियों को मज़बूत करना और फर्टिलाइजर को रैगुलेट में सुधार करना था। जबकि इसके बजाय इस फंड का इस्तेमाल परिवहन बजट बनाने में हुआ।

छूट न देने से 10.50 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

कैग ने खुलासा किया कि मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) डायमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) उर्वरकों पर छूट का लाभ किसानों को नहीं दे पाया। इस कारण उन पर 10.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। 2021-22 में, ऊँची दरों पर फर्टिलाइजर खरीदकर किसानों को सस्ते दामों पर बेचने से मार्कफेड को 4.38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसका खामियाजा आखिरकार सरकारी खजाने को भुगतना पड़ा।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry