लखनऊ
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन को लेकर करारा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने तीनों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और कुछ सवाल पूछे हैं. साथ ही लोकतंत्र पर डाका डालने का आरोप भी लगाया है. खासकर जिलाधिकारी की संलिप्तता की जांच की मांग उठाई है.
अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, डीएम लोगों से जनता का एक मासूम सवाल है, क्यों इतने सालों बाद आया जवाब है? जिस तरह कासगंज, बाराबंकी, जौनपुर के DM हमारे 18000 शपथपत्रों के बारे में अचानक अति सक्रिय हो गए हैं, उसने एक बात तो साबित कर दी है कि जो चुनाव आयोग कह रहा था कि ‘एफ़िडेविट की बात गलत है’ मतलब एफिडेविट नहीं मिले, उनकी वो बात झूठी निकली. अगर कोई एफिडेविट मिला ही नहीं, तो ये जिलाधिकारी लोग जवाब किस बात का दे रहे हैं. अब सतही जवाब देकर खानापूर्ति करेन वाले इन जिलाधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए. कोर्ट संज्ञान ले, चुनाव आयोग या डीएम में से कोई एक तो गलत है ही ना?
आगे अखिलेश यादव ने कहा, जो सीसीटीवी पर पकड़े गये हों उनके द्वारा अपने घपलों पर दी गयी सफाई पर किसी को भी रत्ती भर विश्वास नहीं है. झूठ का गठजोड़ कितना भी ताकतवर दिखे पर आखिरकार झूठ हारता ही है, क्योंकि नकारात्मक लोगों का साझा-गोरखधंधा अपने-अपने स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए होता है, ऐसे भ्रष्ट लोग न तो अपने ईमान के सगे होते हैं, न परिवार, न समाज के, तो फिर भला अपने साझेदारों के कैसे होंगे. ये बेईमान लोग देश और देशवासियों से ताउम्र दगा करते हैं और अंततः पकड़े जाने पर अपमान से भरी जिंदगी जीने की सजा काटते हैं.
भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत वो ‘चुनावी तीन तिगाड़ा’ हैं, जिसने सारा काम बिगाड़ा है और देश के लोकतंत्र पर डाका डाला है. अब जनता इस ’त्रिगुट’ की अदालत लगाएगी.
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