कानपुर
यूपी के फर्रुखाबाद की एक 60 वर्षीय महिला महिमा गंगवार के लिए कहावत 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय' सच साबित हुई, जब वह शनिवार देर रात कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक चलती ट्रेन से गिर गईं। आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) के जवानों की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से उनकी जान बच गई। महिला का बेटा कानपुर के हैलट अस्पताल में डॉक्टर है।
महिमा अपने पति राजवीर सिंह के साथ कानपुर से भोपाल जाने के लिए 12593 गरीब रथ एक्सप्रेस में सवार होने की कोशिश कर रही थीं। ट्रेन आधी रात 12:35 बजे स्टेशन पर आई और उन्हें अपना कोच ढूंढने में देर हो गई। जब तक वे कोच तक पहुंचे, ट्रेन चल पड़ी थी। जल्दबाजी में चढ़ने की कोशिश में महिमा का पैर फिसल गया और वह ट्रेन के पायदान और प्लेटफॉर्म के बीच की जगह में गिर गईं।
आसपास के लोग शोर मचाने लगे। यह देखकर, वहां मौजूद आरपीएफ के एएसआई सीपी सिंह तुरंत हरकत में आए। उन्होंने महिमा को प्लेटफॉर्म की तरफ खिसकने की हिदायत दी और अपने साथी सिपाहियों अनिल कुमार और श्रवण कुमार को तुरंत ट्रेन की चेन खींचने का आदेश दिया। सिपाहियों ने बिना एक पल की भी देरी किए चेन खींची और ट्रेन रुक गई। इसके बाद, आरपीएफ टीम ने महिमा को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार के लिए स्टेशन पर ही बनी मोटर कार से प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ले गए।
शुरुआती इलाज के बाद, उन्हें आगे के उपचार के लिए हैलट अस्पताल रेफर किया गया। आरपीएफ ने बताया कि महिमा का बेटा हैलट अस्पताल में डॉक्टर है। इस घटना के कारण ट्रेन को 15 मिनट की देरी हुई, लेकिन महिमा की जान बच गई। इस घटना प्रत्यक्षदर्शी आरपीएफ की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह घटना आरपीएफ कर्मियों की तत्परता और उनके सेवाभाव का शानदार उदाहरण है।
थोड़ी देर तक स्तब्ध रहे लोग
चलती ट्रेन से महिमा गंगवार के फिसलने और प्लेटफार्म-सीढ़ियों के बीच उनके फंस जाने की घटना जिसने भी देखी वो कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया। आरपीएफ की चुस्ती और त्वरित ऐक्शन से ट्रेन रोक दी गई और महिमा गंगवार की जान बच गई। इसके बाद ही लोगों की जान में जान आई।
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