संभल
जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा प्रकरण में अब तक कुल 12 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 11 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। एक प्रकरण की विवेचना अभी प्रक्रियाधीन है। पुलिस ने डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर 96 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। जबकि जामा मस्जिद के सदर समेत छह लोगों को जमानत मिल चुकी है। हालांकि, 74 उपद्रवियों के पोस्टर जारी होने के बाद भी उनका कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया है।
जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के मामले में जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। हिंसा में 12 मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें से नौ मुकदमे कोतवाली संभल में, दो नखासा थाने में और एक मुरादाबाद जिले के पाकबड़ा थाने में दर्ज हुआ था। बाद में पाकबड़ा में दर्ज मुकदमा स्थानांतरित होकर संभल कोतवाली में जोड़ दिया गया, जिसकी विवेचना फिलहाल जारी है।
आरोपियों की गिरफ्तारी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो क्लिप और मौके से मिले अन्य साक्ष्यों के आधार पर की गई। डिजिटल और फिजिकल सबूतों के सहारे कई उपद्रवियों की पहचान सुनिश्चित कर गिरफ्तारी की गई। अब तक कुल 96 लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। वहीं, 74 उपद्रवियों के खिलाफ पोस्टर जारी कर उनकी तलाश की जा रही है। हालांकि इनका अब तक कोई सुराग हाथ नहीं लग सका है।
प्रकरण में गिरफ्तार किए गए कई आरोपित जमानत पर बाहर आ चुके हैं। इनमें जफर अली से पहले मरियम, फैजान, शाने आलम, अरशद और रेहान जैसे नाम शामिल हैं। इन आरोपितों में से कुछ का नाम प्रारंभिक प्राथमिकी में दर्ज नहीं था, जबकि कुछ के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें अदालत से राहत मिली। मरियम को पुलिस ने 87 दिन जेल में बिताने के बाद रिहा किया था। वहीं आठ अप्रैल को जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली को भी जमानत मिल गई।
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