झारखंड में CBI कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, 10 लोग दोषी करार

राज्य

रांची
झारखंड में लागू जमीन संबंधी विशेष कानून 'छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट (सीएनटी एक्ट)' के उल्लंघन से जुड़े 15 साल पुराने मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने राज्य के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का, रांची के तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता कार्तिक कुमार प्रभात सहित 10 लोगों को दोषी करार दिया।

इसके तुरंत बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 30 अगस्त की तारीख तय की है। सिमडेगा निवासी एनोस एक्का वर्ष 2005 से 2008 के बीच अर्जुन मुंडा और बाद में मधु कोड़ा सरकार में मंत्री रहे।

आरोप है कि मंत्री रहते उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी पते का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन की खरीद-फरोख्त की। रांची के तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात ने उनकी मदद की। प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से यह सौदे किए गए।

सीबीआई की जांच में सामने आया कि मार्च 2006 से मई 2008 के बीच एनोस एक्का की पत्नी मेनन एक्का के नाम पर विभिन्न इलाकों में जमीन खरीदी गई। इसमें हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़, नेवरी में 4 एकड़ और चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल भूमि शामिल है।

कोर्ट ने सीबीआई के सभी आरोप सही पाए। इस मामले की सुनवाई सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह ने की। अदालत में दलीलों और गवाहों के आधार पर यह साबित हुआ कि जमीन खरीदने-बेचने में सीएनटी एक्ट का खुला उल्लंघन हुआ है।

गौरतलब है कि छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट,1908 ब्रिटिश शासनकाल में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदाय की जमीन की सुरक्षा करना है। इस कानून के तहत आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को बेचना, गिरवी रखना या स्थानांतरित करना प्रतिबंधित है। यहां तक कि कोई आदिवासी भी अपने थाना क्षेत्र से बाहर के किसी अन्य आदिवासी को भूमि नहीं बेच सकता है।

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