भोपाल
भोपाल को “भिखारी मुक्त शहर” बनाने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है. प्रशासन के तमाम दावों और पहले चलाए गए अभियानों के बावजूद, शहर के प्रमुख चौराहों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर भिखारियों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है. न्यू मार्केट, बोर्ड ऑफिस चौराहा, व्यापम चौराहा, ज्योति टॉकीज, बिट्ठन मार्केट, मंदिरों और बस स्टैंडों जैसे इलाकों में भिखारी बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं.
इनमें से कई भिखारी सामान बेचने का बहाना करते हैं, लेकिन उनका असली मकसद भीख मांगना होता है. ये लोग हाथ में अगरबत्ती, रक्षासूत्र, झाड़ू या कोई सस्ता सामान लेकर राहगीरों से पैसे मांगते हैं. अगर कोई पैसे देने से मना करता है, तो कई बार ये लोग बदतमीजी पर उतर आते हैं. इससे आम लोगों को असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से इस समस्या को हल करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे. कुछ समय पहले भोपाल प्रशासन ने शहर को भिखारी मुक्त बनाने के लिए एक अभियान शुरू किया था. इस दौरान कई भिखारियों को आश्रय गृहों में भेजा गया था, लेकिन अभियान के रुकते ही ये लोग फिर से सड़कों पर लौट आए. भोपाल कलेक्टर ने इस मुद्दे पर कहा कि हाल के दिनों में यह अभियान धीमा पड़ गया है, लेकिन त्योहारों के बाद जल्द ही भिखारियों को हटाने के लिए विशेष अभियान फिर से शुरू किया जाएगा.
हालांकि, स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह सब सिर्फ “कागजी कार्रवाई” बनकर रह गया है. वे चाहते हैं कि प्रशासन केवल अभियान चलाकर दिखावा न करे, बल्कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले. लोगों का कहना है कि भिखारियों के पुनर्वास के लिए ठोस योजनाएं बनाई जाएं, जैसे उन्हें रोजगार के अवसर देना या आश्रय गृहों में बेहतर सुविधाएं देना. तभी भोपाल वास्तव में एक स्वच्छ, व्यवस्थित और भिखारी मुक्त शहर बन सकता है. नागरिकों की मांग है कि प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से काम करे और भोपाल को एक आदर्श शहर बनाने का सपना साकार करे.
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