जयपुर
राजस्थान विधानसभा के युवा और तेजतर्रार चेहरे शिव विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी ने अमर उजाला से खास बातचीत में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाने की जितनी घोषणाएं की गईं, वे सब केवल कागजों तक सीमित हैं, धरातल पर स्थिति बेहद निराशाजनक है।
भाटी ने कहा कि खेजड़ी बचाओ आंदोलन लंबे समय से चल रहा है और इसे पूरे प्रदेश के लोगों, व्यापारियों और समाज का व्यापक समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि वर्तमान सरकार वह करे, जो पहले किसी सरकार ने नहीं किया। ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू कर खेजड़ी और अन्य पेड़ों को कानूनी सुरक्षा दे। यह सरकार के खाते में बड़ी उपलब्धि होगी।
सरकार का दावा है कि पिछले दो साल में 17-18 करोड़ पेड़ लगाए गए हैं। इस पर सवाल उठाते हुए भाटी ने कहा कि जब इतने करोड़ पेड़ लगाए गए तो धरातल पर क्यों नहीं दिखते? एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत करोड़ों पौधे लगाने का दावा हुआ, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है। वास्तव में ये पेड़ सिर्फ कागजों पर लगे हैं।
विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि अगर पिछले पांच साल में जितने पेड़ लगाने की बातें हुईं, उतने पेड़ सचमुच लग गए होते तो राजस्थान हरा-भरा होता। करोड़ों रुपये का फंड खर्च हुआ, लेकिन असलियत शून्य है। सरकार पहले लगे पेड़ों को बचाए, नए लगाने की जल्दबाजी न करे।
भाटी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग रखी थी, परंतु पक्ष-विपक्ष के हंगामे में विषय दब गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सदन के अंदर बैठे लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं? ग्लोबल वार्मिंग पर दुनिया चर्चा कर रही है, ऐसे में हमारी विरासत खेजड़ी को बचाना आवश्यक है। केर-सांगरी की सब्जी के बढ़ते फैशन का उदाहरण देते हुए भाटी बोले कि खेजड़ी सबको चाहिए, पर इसे बचाने की बात करने में नेताओं की सांस फूल रही है। मैं बड़े नेताओं से कहना चाहूंगा कि यह केवल जैसलमेर-बाड़मेर का मुद्दा नहीं, पूरे राजस्थान की जरूरत है। जो इस पर बोलेंगे, जनता उन्हें सर माथे पर बिठाएगी।
भाटी ने स्पष्ट कहा कि यह कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को ऑक्सीजन देने का संघर्ष है। उन्होंने सरकार को दो-टूक संदेश दिया कि जल्द से जल्द ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
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