ट्रंप के करीबी रहे सर्जियो गोर पर उठा सवाल – क्या वे भारत में राजदूत बनने योग्य हैं?

देश

नई दिल्ली
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का अगला राजदूत और दक्षिण व मध्य एशिया मामलों के लिए विशेष दूत नियुक्त करने के फैसले पर कड़ा सवाल उठाया है। बोल्टन ने साफ कहा कि वह गोर को इस जिम्मेदारी के लिए "योग्य नहीं" मानते। बोल्टन ने कहा, "मैं नहीं मानता कि सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के राजदूत बनने के योग्य हैं।" बोल्टन की यह टिप्पणी भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले दो दशकों के संभवतः सबसे खराब दौर की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें ट्रंप की टैरिफ नीति और उनके प्रशासन द्वारा भारत की लगातार आलोचना के कारण तनाव और बढ़ गया है।

38 वर्षीय सर्जियो गोर ट्रंप के करीबी सलाहकार हैं और वाइट हाउस में सीधे राष्ट्रपति तक पहुंच रखते हैं। हालांकि एएनआई को दिए इंटरव्यू में बोल्टन ने उनकी अंतरराष्ट्रीय अनुभव और जटिल वैश्विक मुद्दों की समझ पर चिंता जताई। पूर्व एनएसए ने कहा कि गोर की नियुक्ति ट्रंप की "व्यवहारिक" विदेश नीति का हिस्सा लगती है, जो रणनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत वफादारी पर आधारित है।

ट्रंप ने अगस्त में ट्रूथ सोशल पर घोषणा की थी कि वे सर्जियो गोर को भारत के लिए अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत के पद पर पदोन्नत कर रहे हैं। ट्रंप ने गोर को "मेरा शानदार दोस्त" बताते हुए उनकी सराहना की थी। उन्होंने लिखा, "राष्ट्रपति कार्मिक निदेशक के रूप में, सर्जियो और उनकी टीम ने रिकॉर्ड समय में लगभग 4,000 अमेरिका फर्स्ट पैट्रियट्स को केंद्र सरकार के हर विभाग में भर्ती किया है- हमारे विभाग और एजेंसियां 95 प्रतिशत से अधिक भरी हुई हैं! सर्जियो अपनी वर्तमान भूमिका में तब तक बने रहेंगे जब तक उनकी (संसद द्वारा) पुष्टि नहीं हो जाती।"

रूसी तेल खरीद पर बोल्टन की टिप्पणी: प्रतिबंधों में 'असंगति'
ट्रंप के पिछले कार्यकाल में एनएसए रहे बोल्टन ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कई देशों ने रूस से कच्चा तेल खरीदकर प्रतिबंधों की "कमजोरी" का फायदा उठाया। उनके अनुसार, प्रतिबंधों का मकसद रूस की आय को कम करना था ताकि उसका युद्ध तंत्र कमजोर हो सके, लेकिन तेल बिक्री को पूरी तरह रोकना नहीं था, क्योंकि ऐसा करने से यूरोप और अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ सकती थीं। बोल्टन ने कहा, “यहां तक कि तकनीकी रूप से कई देशों ने प्रतिबंधों का उल्लंघन भी नहीं किया, बल्कि रूस से कैप प्राइस से नीचे तेल खरीदकर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दाम पर बेचा। मूल उद्देश्य यही होना चाहिए कि रूस के युद्ध तंत्र को फंडिंग न मिले।”

भारत को दी सलाह – "ट्रंप को वन-टाइम डील मानें"
पूर्व NSA बोल्टन ने भारत को सलाह देते हुए कहा कि नई दिल्ली को ट्रंप को "एक बार की घटना" मानना चाहिए और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर फैसले करने चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत सरकार को चाहिए कि ट्रंप को एक ‘वन-टाइम प्रपोजिशन’ की तरह देखें और अपने हितों के अनुसार कदम उठाएं। ट्रंप की नीतियां अमेरिकी राजनीति के बड़े दृष्टिकोण को नहीं दर्शातीं।"

ट्रंप की विदेश नीति शैली पर तीखी आलोचना
बोल्टन ने ट्रंप की विदेश नीति को "अनिश्चित और लेन-देन आधारित" बताते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की बड़ी वजह ट्रंप का "अनियमित और अस्थिर" तरीका रहा है। ट्रंप ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाते हुए कुल दंडात्मक टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया है। यह दबाव इसलिए बनाया गया ताकि भारत रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद बंद करे। इस कदम से दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापार वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ा है।

 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry