श्रीनगर
भारतीय जनता पार्टी के महासचिव अशोक कौल ने शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती द्वारा गृह मंत्री से यासीन मलिक के मामले की समीक्षा की मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस अनुरोध में कोई दम नहीं है।
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कौल ने कहा, यासीन मलिक के अपहरण मामले में उनके परिवार के सदस्य ने उनकी पहचान की है। अब मानवीय आधार पर समीक्षा की मांग करने का क्या मतलब है? अगर ऐसा होता, तो उनकी पहचान ही नहीं होनी चाहिए थी। कानून अपना काम करेगा।
उन्होंने मलिक से जुड़ी बातों पर आगे टिप्पणी करते हुए कहा, मुझे नहीं पता कि प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले व्यक्ति के दिमाग में क्या था। ये आंतरिक विवाद हैं। मलिक का दावा है कि कांग्रेस ने उन्हें पाकिस्तान भेजा था, जबकि दूसरे लोग कुछ और कहते हैं।
कौल ने कहा, आखिरकार, उनके अपने परिवार ने ही उनकी पहचान की। उनके अपहरण की कहानियां तो चलती रहेंगी, लेकिन मैं कश्मीरियों से ऐसी कहानियों से दूर रहने का आग्रह करता हूँ। इन नेताओं का असली चेहरा सामने आ गया है, और आगे और भी खुलासे होंगे।
कौल ने ऐतिहासिक घटनाओं का भी हवाला देते हुए कहा, नरसिंह राव को किसी को भेजना था, लेकिन उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को भेज दिया, जो उस समय विपक्ष के नेता थे। उन्हें भारत के लिए बोलने का अवसर मिला और उन्होंने विदेश में देश को बदनाम करने से इनकार कर दिया, जैसा कि कुछ पूर्व नेताओं ने भारत की छवि खराब करने के लिए विदेश में जाकर किया था।
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