लेह में कर्फ्यू लागू, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, इंटरनेट सेवाओं पर भी असर

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लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर चला शांतिपूर्ण आंदोलन बुधवार को हिंसा में तब्दील हो गया. लेह की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों ने हालात बिगाड़ दिए. उपद्रव में चार लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए. स्थिति काबू से बाहर होती देख प्रशासन ने लेह और करगिल में कर्फ्यू लगा दिया. इंटरनेट स्पीड घटा दी और पुलिस-सीआरपीएफ की भारी तैनाती कर दी. फिलहाल, केंद्र शासित प्रदेश में अब तनावपूर्ण शांति है.

लेह पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर एक्शन लिया है और 50 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि मामले में जांच चल रही है. दोषियों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जाएगा. 

इससे पहले बुधवार दोपहर उग्र प्रदर्शनकारियों ने लेह में राजनीतिक दल के कार्यालय और सरकारी इमारतों में आग लगा दी. पुलिस वाहनों को फूंक दिया और सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया. घायलों में 40 पुलिस और सीआरपीएफ जवान भी शामिल हैं. फिलहाल, लेह में कर्फ्यू जारी है. प्रशासन की ओर से सख्त निषेधाज्ञा लागू की गई है. लोगों से शांति बहाल करने की अपील की जा रही है. शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और सीआरपीएफ की भारी तैनाती है. 

जिन इलाकों में बुधवार को हिंसा हुई थी, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. प्रशासन ने हिंसा भड़कने के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उनके भड़काऊ बयानों ने युवाओं को उकसाया. ऐहतियात के तौर पर लेह में इंटरनेट स्पीड भी धीमी कर दी गई है.

गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि आंदोलन के बीच भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के भड़काऊ भाषणों ने भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया. मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक ने 'अरब स्प्रिंग' और नेपाल में Gen-Z विरोध का हवाला देकर लोगों को गुमराह किया. इसी दौरान हिंसा भड़क उठी और वांगचुक ने हड़ताल तोड़ दी. स्थिति को काबू में करने को लेकर प्रयास किए बिना वो एंबुलेंस से अपने गांव लौट गए.

सरकार ने कहा कि हम लद्दाख के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संवाद की प्रक्रिया से अब तक कई महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं. इनमें अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% किया गया. परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित हुआ. भोटी और पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक भाषा घोषित किया गया. 1800 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई.

हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित लोग उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) के जरिए हो रही बातचीत को विफल करने में लगे हैं. घटनाओं के बाद लेह और करगिल दोनों जिलों में कर्फ्यू और बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई. 

हिंसा के बाद वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की मांगों की अनदेखी ही इस संकट का कारण है. CPI(M) और CPI(ML) ने केंद्र पर संवैधानिक अधिकार छीनने और दमन की राजनीति करने का आरोप लगाया. कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं ने भी घटना पर संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने की मांग की. वहीं, बीजेपी ने हिंसा को साजिश करार दिया. लद्दाख में 1989 के बाद यह सबसे गंभीर हिंसक घटना बताई जा रही है. प्रशासन ने बुधवार शाम 4 बजे तक स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया, लेकिन इलाके में तनाव अभी भी बरकरार है.

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