दर्द भरे अतीत पर 64 साल बाद पछतावा, डेनमार्क प्रधानमंत्री ने पीड़ित महिलाओं से मांगी माफी

दुनिया

 कोपेनहेगेन

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मैटे फ्रेडरिकसन ने  ग्रीनलैंड की राजधानी नुक का दौरा किया. उन्होंने इस दौरान डेनमार्क के उस काले अध्याय और उससे उपजी अथाह पीड़ा को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक तौर पर महिलाओं से माफी मांगी. 

डेनमार्क में 1960 से लेकर 1991 तक देश के एक बड़े क्षेत्र की महिलाओं की जबरन नसबंदी की गई. इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के सबसे बड़े मामलों में से एक माना गया.

पीएम फ्रेडरिकसन ने इस दौरान भावुक होते हुए कहा कि जो हुआ हम उसे बदल नहीं सकते, लेकिन जिम्मेदारी ले सकते हैं. मैं डेनमार्क की ओर से माफी मांगती हूं. इस घटना पर प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन ने 24 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी. 

60 के दशक में बड़े पैमाने पर महिलाओं विशेष रूप से स्कूली बच्चियों के गर्भाशय में IUD डिवाइस लगा दी गई थी. इनमें से कई लड़कियां 12 साल या इससे कम उम्र की थीं. इन किशोरियों में कॉपर टी लगाए गए या हार्मोनल इंजेक्शन दिए गए. इसके लिए ना तो इन बच्चियों की सहमति ली गई और ना ही उनके परिवारजनों की. रूटीन चेकअप के नाम पर यह धांधली की गई. 

रिपोर्ट के मुताबिक, 1960 के दशक से 1992 तक डेनमार्क में लगभग 4,500 इनुइट महिलाओं में गर्भनिरोधक कॉयल (कॉपर टी) लगाया गया, वो भी उनकी सहमति के बिना. इसका उद्देश्य इनुइट समुदाय में जन्म दर को कम करना था. इसका उद्देश्य ग्रीनलैंड की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना था, जो डेनिश औपनिवेशिक नीतियों का हिस्सा था.

इस रिपोर्ट के बाद लगभग 150 महिलाओं ने डेनमार्क की सरकार के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन का मुकदमा दायर किया है, जिसकी सुनवाई अभी जारी है. 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry