बेंगलुरु
कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने गुरुवार को सभी क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं को हर महीने पेड पीरियड लीव देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक के बाद बेंगलुरु स्थित विधान सौध में मीडिया से बात करते हुए, विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने इसका ऐलान किया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया।
मंत्री पाटिल ने बताया कि मासिक धर्म अवकाश राज्य भर के सरकारी कार्यालयों, कारखानों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी), आईटी फर्मों और निजी औद्योगिक क्षेत्रों में लागू होगा। चार राज्यों में अपनाई जा रही इस नीति के बारे में पूछे जाने पर, मंत्री पाटिल ने कहा कि सरकार द्वारा कोई अध्ययन नहीं किया गया है। चूंकि यह नीति अन्य राज्यों में उपयोगी और सफल रही है, इसलिए इसे कर्नाटक में भी अपनाया गया है।
राज्य के श्रम मंत्री संतोष लाड ने कहा, "हम पिछले एक साल से मासिक धर्म अवकाश देने का नियम लागू करने के लिए काम कर रहे हैं। महिलाओं पर कई जिम्मेदारियां होती हैं। घर के काम के साथ-साथ वे बच्चों की देखभाल भी करती हैं। मासिक धर्म के दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का तनाव होता है। इसलिए, हमने मासिक धर्म अवकाश देने पर विचार-विमर्श के लिए एक समिति बनाई। समिति ने सालाना छह दिन की छुट्टी की सिफारिश की थी। सरकार ने अब सालाना 12 दिन की छुट्टी देने का फैसला किया है।"
श्रम मंत्री ने आगे कहा, "हमें नहीं पता कि इसे दूसरे राज्यों में कैसे लागू किया गया, लेकिन कर्नाटक में हम इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सरकारी और निजी, सभी क्षेत्रों में लागू होगा।" मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उर्वरक भंडारण के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित करने पर भी सहमति व्यक्त की। राज्य सरकार ने बताया कि 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पुलों के पुनर्निर्माण और नवीनीकरण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। कर्नाटक भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों के लिए दूसरे चरण में 405.55 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 11 श्रमिक आवासीय विद्यालय स्थापित करने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
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