राज्यपाल द्वारा 2 सत्रों में 5 विभागों की समीक्षा, जनजातीय गौरव दिवस पर भी रिहा होंगे बंदी

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल 
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय कल्याण के लिये किये जा रहे कार्यों की जानकारी समुदाय को उपलब्ध कराने के प्रयासों पर विशेष बल दिया जाये। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के सभी जिलों में गौरव दिवस का आयोजन किया जाए। राज्यपाल श्री पटेल शुक्रवार को राजभवन में गृह, जेल, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में चर्चा कर रहे थे। बैठक का आयोजन 2 सत्रों में किया गया था। प्रथम सत्र में राज्यपाल ने गृह, जेल और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की। द्वितीय सत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जन-मन योजना की समीक्षा की।

जनजातीय गौरव दिवस पर भी रिहा होंगे बंदी
राज्यपाल श्री पटेल ने अच्छा आचरण करने पर बंदियों को रिहा करने के वर्ष में नियत 4 अवसरों में देश में पहली बार 15 नवम्बर जनजातीय गौरव दिवस को शामिल करने की राज्य सरकार की पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जेल विभाग मुक्त बंदियों के लिये सामाजिक स्वीकार्यता और आश्रित परिवारों के पुनर्वास प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये समाज कल्याण विभाग के साथ दायित्वों की नीतिगत व्यवस्था तैयार करें। उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति आकस्मिकता राहत योजना के प्रावधानों पर तत्काल कार्यवाही की व्यवस्था की निरंतर मॉनिटरिंग कर फास्ट-ट्रेक प्रक्रिया में प्रकरणों के निराकरण के प्रयास करने के लिये कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना के घरों में प्रकाश आदि की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के लिये कहा है।

राज्यपाल श्री पटेल को बताया गया कि वर्ष 2025 के दौरान 26 जनवरी गणतंत्र दिवस, 14 अप्रैल डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस और 2 अक्टूबर के अवसर पर कुल 523 बंदियों को रिहा किया है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर 29 बंदियों जिसमें 8 अनुसूचित जनजाति वर्ग के बंदियों को रिहा किया जाना प्रस्तावित है। अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध चिन्हित प्रकरणों को वापस लेने के लिये शासन द्वारा तय किया गया है कि जिन प्रकरणों में अतिक्रमण हटा लिया गया है, वह सभी मामले वापस ले लिये जायेंगे। अनुसूचित जनजातीय वर्ग के व्यक्तियों के विरूद्ध 3 मार्च 2009 की स्थिति में वन अपराध के पंजीबद्ध कुल 87 हजार 549 प्रकरण शासन द्वारा वापस लिये गये हैं। विगत 10 वर्षों में दर्ज 35 हजार 807 प्रकरणों में से 28 हजार 645 निराकृत हो गये हैं। न्यायालय में 4 हजार 396 प्रकरण विचाराधीन हैं। बैठक में बताया गया कि पेसा एक्ट के तहत गठित 492 ग्राम सभाओं के साथ ही 735 ग्राम सभा के लिये नये आवेदन प्राप्त हुए हैं।

बैठक में अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, महानिदेशक जेल श्री वरूण कपूर, विशेष महानिदेशक जेल श्री जी. अखितो सेमा और वन, गृह, जेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

 

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