जबलपुर
ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के लिए सबसे आधुनिक बम के तीन नए वर्जन पर कार्य कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर में मिली सफलता के बाद एल-70 के प्रमुख एम्युनेशन के साथ यह नए वर्जन की श्रृंखला जुड़ गई है। बता दें कि बीएमपी-2 सीरीज में अनेक खूबियों के साथ इसको और शक्तिशाली बनाया गया है। निर्माणी को 2280 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य हासिल हुआ है। जिसमें 900 करोड़ रुपये का कार्य पूरा हो चुका है। मार्च तक लक्ष्य पूरा है। निर्माणी को पिछले साल 1800 करोड़ रुपये का उत्पादन लक्ष्य मिला था और सफल लक्ष्य के साथ पूरे आयुध निर्माणियों में अव्वल रही। यह एक रिकॉर्ड है।
महत्वपूर्ण है कि ओएफके अपने शानदार रक्षा उत्पादन के लिए देश की सभी 41 आयुध निर्माणी में अव्वल बनी हुई है। एमआइएल की यह इकाई भी पूरे ग्रुप में आगे है। पिछले सत्र में रिकॉर्ड उत्पादन के बाद इस बार में वह कीर्तिमान बनाने की अग्रसर है। जिसमें भारतीय वायुसेना के लिए अनेक प्रमुख उत्पादों की श्रृंखला पर कार्य चल रहा है। आपरेशन सिंदूर में ओएफके में बने उत्पादों ने शानदार छाप छोड़ी थी। एल-70 की सफलता में उसके बने एम्युनेशन काफी सफल साबित हुए और दुश्मन पर प्रहार करने में आगे बने रहे।
रशियन विशेषज्ञ कार्य में दे रहे सहयोग
इसी के साथ रशिया के मैंगो बम प्रोजेक्ट पर भी टीम कार्य कर रही है। यह प्रोजेक्ट दोनों देशाें के साझा सहयोग से आगे बढ़ रहा है। रूस के विशेषज्ञ का इन दिनों निर्माणी में डेरा है। वे इस प्रोजेक्ट से संबंधित विशेष प्रशिक्षण के लिए यहां आए हुए हैं और निर्माणी की तकनीकी टीम को प्रशिक्षण देने के साथ इसके प्रमुख बिंदुओं से अवगत कराने का प्रयास भी कर रही है।
पिकोरा बम का उत्पादन रूका
सूत्रों के अनुसार इस बीच रशिया निर्मित पिकोरा बम की री-फीलिंग का कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। पिछले साल इस बम की रि-फीलिंग के दौरान दो कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई थी। फिलहाल उच्च स्तरीय जांच का काम चल रहा है। जिसकी प्रक्रिया लंबी है, जिसके बाद इसके उत्पादन पर कोई अंतिम निर्णय संभव है।
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