चंडीगढ़
प्रसिद्ध पंजाबी गायक और अभिनेता 35 वर्षीय राजवीर जवंदा का निधन 8 अक्तूबर को अस्पताल में इलाज के दौरान हो गया था। शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया था कि उनकी मौत हिमाचल प्रदेश के बद्दी में हुए सड़क हादसे के कारण हुई, लेकिन अब सामने आई नई जांच रिपोर्ट ने इस दावे को गलत ठहराया है। जांच में खुलासा हुआ है कि बाइक दुर्घटना बद्दी में नहीं, बल्कि पिंजौर में हुई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हादसा 27 सितंबर को उस समय हुआ, जब जवंदा शिमला की ओर जा रहे थे। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और आरोप है कि पिंजौर स्थित एक निजी अस्पताल ने प्रारंभिक इलाज देने से मना कर दिया। इस देरी के कारण उनकी हालत और बिगड़ गई, जो संभवतः उनके जीवन के लिए घातक साबित हुई।
लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल (LFHRI) की जांच रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पिंजौर पुलिस स्टेशन की डेली डायरी रिपोर्ट (DDR) और स्थानीय जांच के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि पिंजौर के शौरी अस्पताल ने घायल गायक को आपातकालीन प्राथमिक उपचार देने से इनकार कर दिया। इसके बाद राजवीर जवंदा को क्रमशः पंचकूला के सरकारी अस्पताल, फिर पंचकूला के एक निजी अस्पताल और अंततः मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन वे जीवन की जंग हार गए।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
एडवोकेट नवकिरण सिंह LFHRI के महासचिव हैं। उन्होंने एक पत्रकार के साथ मिलकर दुर्घटना स्थल का दौरा किया और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। अब संगठन हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है, जिसमें चिकित्सीय लापरवाही (Medical Negligence) का मामला उठाया जाएगा। यह याचिका न केवल जवंदा के मामले में न्याय की मांग करेगी, बल्कि इन व्यापक मुद्दों को भी उजागर करेगी जैसे आपात स्थिति में अस्पतालों और डॉक्टरों की जिम्मेदारी, सड़कों पर आवारा पशुओं से बढ़ता खतरा और आपातकालीन चिकित्सा ढांचे की कमी।
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