राजवीर जवंदा केस: अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में, डॉक्टरों ने दी सफाई

राज्य

पिंजौर 
मशहूर पंजाबी गायक और अभिनेता राजवीर जवंदा की सड़क हादसे में हुई मौत को लेकर नया खुलासा सामने आया है। अब यह साफ हो गया है कि हादसा हिमाचल प्रदेश के बद्दी में नहीं, बल्कि पिंजौर-बद्दी हाईवे पर सेक्टर-30 टी प्वाइंट के पास हुआ था। जवंदा की बाइक के आगे अचानक आवारा पशु (गौवंश) आ गया, जिससे बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

इलाज में देरी बनी जानलेवा
हादसा 27 सितंबर की सुबह हुआ था। गंभीर रूप से घायल जवंदा को उनके साथियों ने तुरंत जे.एन. शौरी मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल, पिंजौर में भर्ती कराया।लेकिन आरोप है कि निजी अस्पताल ने इलाज करने से मना कर दिया और सिर्फ प्राथमिक उपचार देकर उन्हें पंचकूला सेक्टर-6 सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहीं से उन्हें आगे मोहाली के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद 8 अक्तूबर को उनकी मौत हो गई।स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अगर जवंदा को समय पर उचित इलाज मिल जाता, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।

डॉक्टरों ने दी सफाई—“मरीज बेहोश था, बाहरी चोट नहीं दिखी”
जे.एन. शौरी अस्पताल के डॉक्टर विमल शौरी और मोहित शौरी ने बताया कि राजबीर नामक एक बेहोश मरीज को दो साथी सुबह लगभग 9 बजे अस्पताल लेकर आए थे। डॉ. मोहित ने बताया,  “मरीज के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं थी। हमने तुरंत इंजेक्शन और दवाइयां देकर करीब 15–20 मिनट तक होश में लाने की कोशिश की, लेकिन वे रिवाइव नहीं हुए। हमें लगा कि मरीज को बड़े अस्पताल में आगे का इलाज मिलना चाहिए, इसलिए हमने रेफर कर दिया।”

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