उत्तराखंड में शादी के नियम बदले, नेपाल-तिब्बत-भूटान नागरिकों के लिए अब ये दस्तावेज मान्य

देश

देहरादून 
देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। गृह सचिव शैलेश बगोली ने बैठक के बाद कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। गृह सचिव शैलेश बगोली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कैबिनेट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत आने वाले मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों को उच्चीकृत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बैठक में रायपुर क्षेत्र के अंतर्गत छोटे घरों और दुकानों को नियमित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई। राज्य सरकार ने फ्रीज जोन में राहत देने का भी फैसला किया है। इसके लिए नए मानक जल्द जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों और कार्यकर्ताओं को सेवा अवधि में एक बार जनपद परिवर्तन की अनुमति दी है। इससे लंबे समय से एक ही जिले में कार्यरत कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

गृह सचिव शैलेश बगोली के अनुसार, कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत विवाह पंजीकरण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संशोधन मंजूर किया। पहले नेपाली, तिब्बती और भूटानी मूल के लोगों को आधार कार्ड के आधार पर विवाह की अनुमति थी, लेकिन अब अन्य वैध दस्तावेजों को भी मान्यता दी जाएगी। नेपाली और भूटानी नागरिक अपने देश का नागरिकता प्रमाण पत्र या भारत में 182 दिन तक रहने वाले नेपाली मिशन और रॉयल भूटानी मिशन की ओर से जारी सीमित वैध पहचान पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। तिब्बती नागरिकों के लिए विदेशी पंजीकरण अधिकारी की ओर से जारी वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र को मान्य माना जाएगा।
कैबिनेट ने कार्मिक विभाग में स्थायीकरण से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके अलावा विधायी विभाग के विशेष सत्र आयोजन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है।

उत्तराखंड के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देहरादून में विशेष विधानसभा सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस विशेष सत्र की तारीख घोषित करने के लिए अधिकृत किया गया है। यह सत्र राज्य की 'सिल्वर जुबली' के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाएगा।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "उत्तराखंड की 'सिल्वर जुबली' के अवसर पर विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। राज्य के गठन के 25 साल पूरे होने पर इस अवधि में उत्तराखंड की ओर से देखे गए अलग-अलग उतार-चढ़ावों पर चर्चा की जाएगी।"

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