भोपाल
प्रदेश को वर्ष 2025-26 में 2,90,879 करोड़ रुपये सभी माध्यमों से मिलने की उम्मीद थी लेकिन जीएसटी की दरों में किए गए सुधार से अनुमान गड़बड़ा सकता है। दरअसल, केंद्रीय करों में प्रदेश का हिस्सा 1,11,662 करोड़ रुपये का है लेकिन जीएसटी की नई दरों के कारण इसमें कमी संभावित है।
जीएसटी में अभी प्रदेश को 17 हजार करोड़ रुपये मिले हैं। जबकि, राज्य के करों से 1.31 लाख करोड़ रुपये राजस्व मिलने के अनुमान के विरुद्ध अभी तक 54 हजार करोड़ रुपये ही खजाने में आए हैं। जल जीवन मिशन में भी भारत सरकार से राशि नहीं मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में राजस्व से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों को लक्ष्य पूर्ति के लिए प्रयास करने के निर्देश दिए।
प्रदेश सरकार ने 2025-26 के बजट में केंद्रीय करों में 17 और राज्य के करों में 11 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। जीएसटी से 32,705 करोड़ और राज्य के जीएसटी से 42,140 करोड़ रुपये मिलना अनुमानित है लेकिन अब यह आंकड़ा गड़बड़ा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि जीएसटी की नई दरों से प्रदेश को लगभग साढ़े आठ हजार करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा हो सकता है। बैठक में प्रदेश को विभिन्न करों के माध्यम से प्राप्त हुए राजस्व, वित्तीय वर्ष की शेष अवधि की संभावना और लक्ष्य को लेकर चर्चा की गई।
इस दौरान बताया गया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत एकल नल जल योजना की लागत में हुई वृद्धि भारत सरकार ने देने से इन्कार कर दिया है। चूंकि, कार्य प्रारंभ हो चुका है इसलिए राज्य के बजट से लगभग तीन हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं। अभी भी भारत सरकार से राशि नहीं मिल रही है, जिसके कारण वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ा रहा है।
अधिकारियों से कहा गया कि वे राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य पर काम करें। साथ ही यह भी देखें कि कहां से अतिरिक्त राशि प्राप्त हो सकती है। भारत सरकार के स्तर पर जो मामले लंबित हैं, उन पर ध्यान दें।
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