जनसहभागिता और स्वावलंबन का पर्व बना दीपोत्सव
अयोध्या
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस बार अयोध्या का दीपोत्सव न सिर्फ भव्यता का बल्कि आत्मनिर्भरता और जनसहभागिता का प्रतीक बन रहा है। लखीमपुर खीरी की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार 25 हजार इकोफ्रेंडली दीए अब अयोध्याधाम की पवित्र भूमि पर रोशनी बिखेरेंगे। यह दीए वहां की मिट्टी और गोबर से बनाए गए हैं, जिनमें जड़ी-बूटियों की प्राकृतिक खुशबू भी समाहित है।
लखीमपुर से पहुंचे 25 हजार दीए
नगर निगम कार्यालय में धौरहरा ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी संदीप कुमार तिवारी ने महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी को ये दीपक सौंपे। इस अवसर पर महापौर ने लखीमपुर की जिलाधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल और मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार का आभार जताया।
जनसहभागिता और स्वावलंबन का उत्सव बना दीपोत्सव
महापौर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का दीपोत्सव अब जनसहभागिता, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि लखीमपुर की महिलाओं का यह योगदान पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी मेहनत और सृजनशीलता से बने दीए अयोध्या की धरती पर आत्मनिर्भर भारत की ज्योति जलाएंगे। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने दीयों को हस्तगत करते हुए लखीमपुर की इस पहल का स्वागत किया और कहा कि यह महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है।
इकोफ्रेंडली दीपोत्सव की दिशा में बड़ा कदम
बीडीओ संदीप तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इकोफ्रेंडली दीपोत्सव मनाने के संकल्प को साकार करने में लखीमपुर की महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। दो माह की मेहनत से आकांक्षी ब्लॉक धौरहरा की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने 25 हजार दीए तैयार किए हैं। उन्होंने बताया कि सीडीओ अभिषेक कुमार ने विकास भवन परिसर से इन दीयों से भरे वाहन को हरी झंडी दिखाकर अयोध्या के लिए रवाना किया।
महिलाओं की मेहनत से आत्मनिर्भरता की लौ
संदीप कुमार ने बताया कि महिलाओं ने कम समय में गोबर और मिट्टी से सुंदर, टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी दीए बनाए हैं। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण की यह मिसाल पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय है।
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