पिछली दिवाली में पटाखा गन से 52 मामले, एक मौत; भोपाल में फिर हादसा, एम्स ने चेताया

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल

भोपाल में पटाखा गन से 11 साल के बच्चे की आंख की पलक जल गई। पुतली पर सफेदी (ल्यूकोकोरिया) छा गई। इस साल दिवाली का यह पहला केस गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के नेत्र विभाग में पहुंचा है। अब बच्चे की आंख बचाने के लिए शनिवार को सर्जरी की जाएगी।

बच्चा पटाखा गन लोड करने के बाद चेक कर रहा था। ऊस वक्त गन चल गई, जिससे पटाखा उसकी आंख में लग गया। GMC के नेत्र विभाग के मुताबिक बच्चे को प्राथमिक उपचार दे दिया गया है। सभी जांचें पूरी कर ली गई हैं। रिपोर्ट आने के बाद नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस कुबरे सर्जरी करेंगे।दूसरी ओर, भोपाल एम्स ने दिवाली को लेकर एडवाइजरी जारी की है। जिसमें बताया है कि इस त्योहार पटाखे फोड़ते वक्त क्या करना चाहिए और किससे बचना है।

बता दें, पिछली दिवाली पर ऐसे ही हादसों में 52 लोग झुलसे थे। पिछली दिवाली पर 91 वर्षीय बुजुर्ग की साड़ी में दीये से आग लग गई थी। 70% झुलसने के बाद उन्हें एम्स भोपाल लाए थे। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, जलने के 15 मरीज एम्स, 13 जेपी और 24 हमीदिया पहुंचे थे। 6 मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ी थी।

आंखों के सबसे ज्यादा मरीज दिवाली पर सबसे ज्यादा मरीज आंखों की चोटों के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। बीते साल एम्स में 14 साल के बच्चे और 29 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी चली गई थी। वहीं, हमीदिया में दो मरीज 50% से ज्यादा झुलसे थे। उनका इलाज बर्न एंड प्लास्टिक विभाग में हुआ था और करीब 20 दिन बाद डिस्चार्ज किया गया।

एम्स ने जारी की एडवाइजरी एम्स भोपाल ने कहा कि दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामूहिक कल्याण का अवसर है। इस अवसर पर एम्स के बर्न्स और प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने जरूरी सावधानियां साझा की हैं।

केमिकल और थर्मल इंजरी के साथ आते हैं मरीज गांधी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की विशेषज्ञ डॉ. अदिति दुबे ने बताया कि दिवाली पर बर्न से संबंधित कई इंजरी आती हैं। मुख्य रूप से ये केमिकल और थर्मल दो प्रकार की होती हैं। केमिकल इंजरी में आंखों में चूना या सफाई और रंगरोगन में उपयोग होने वाली सामग्री चली जाती है। वहीं, थर्मल इंजरी के अधिकतर केस पटाखों से जलने के होते हैं।

डॉ. दुबे ने कहा कि पटाखों से लगने वाली चोटें लंबे समय तक दिक्कत देती हैं, क्योंकि विस्फोट से पहले थर्मल बर्न होता है और उसके बाद उसमें मौजूद केमिकल से हुआ नुकसान देर तक असर दिखाता है।

हर साल की तरह इस बार भी नेत्र विभाग पूरी तरह अलर्ट है। उन्होंने अपील की कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह से जले तो सीधे अस्पताल पहुँचे। आंखों में समय रहते इलाज मिलने से रोशनी बचने की संभावना अधिक रहती है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry