कोलकाता
स्कूल में तीन शिक्षक हैं। तीनों बूथ लेवलआफिसर(बीएलओ) नियुक्त हैं। फिर बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा? यह सवाल उठाते हुए अभिभावकों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) शुरुआत के दिन ही शिक्षकों को स्कूल में बंद कर दिया। उनकी मांग थी कि कोई न कोई यहां रहे। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो। यह घटना मंगलवार को उत्तर 24 परगना के गायघाटा स्थित चंडीगढ़स्पेशलकैडरएफपी स्कूल में हुई।
अभिभावकों ने शिक्षकों को किया स्कूल में बंद
गायघाटा के इस स्कूल में 150 छात्र हैं। तीन शिक्षक हैं लेकिन जिला प्रशासन ने तीनों को बीएलओ की जिम्मेदारी दी है। इससे स्थानीय लोग नाराज हैं। मंगलवार को वे समूह में गए और स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया। उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों को सुबह 11.30 बजे से ही स्कूल में बंद कर दिया गया था। प्रदर्शन करने वाले अभिभावकों ने दावा किया कि हमारे स्कूल में लंबे समय से जरूरी संख्या में शिक्षक नहीं हैं। जिला प्रशासन को बार-बार सूचित करने के बावजूद कोई फ़ायदा नहीं हुआ। स्कूल में 150 बच्चे पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक गरीब इलाका है। हर किसी के पास ट्यूटर रखकर अपने बच्चों को पढ़ाने की क्षमता नहीं है। हम सभी अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल के शिक्षकों पर निर्भर हैं।
स्कूल में शिक्षकों की कमी से नाराजगी
स्कूल भी अच्छा है लेकिन इस स्थिति में अगर सभी शिक्षक बीएलओ के रूप में काम करने चले गए, तो बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा? दूसरी ओर खुद शिक्षकों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन में फंसे होने के बावजूद अभिभावकों की मांगें अनुचित नहीं हैं। स्कूल के एक शिक्षक धीमान चंद्र राय ने कहा कि अभिभावकों ने गेट पर ताला लगा दिया। हमारे तीन शिक्षकों में से तीन को बीएलओ की ज़िम्मेदारी दी गई है। उन्होंने हमें बंद रखा और मांग की कि पढ़ाई बंद न की जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि अभिभावकों की चिंता जायज है। अगर वे एसआइआर के काम में व्यस्त हो गए, तो पढ़ाई प्रभावित होगी। छात्रों की आगे परीक्षाएं हैं।
शिक्षकों के फंसे होने की खबर मिलते ही गायघाटा थाने की पुलिस और संयुक्त बीडीओमयूखबनर्जी स्कूल पहुंचे। उन्होंने अभिभावकों से बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि वे स्कूल की पढ़ाई में कोई बाधा न आनेदें। आश्वासन मिलने के बाद अभिभावकों ने गेट खोला। हालांकि, शिक्षक के आने तक वे चिंता से मुक्त नहीं हो सके।
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