नई दिल्ली
लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार के दौर में अपने राजनीतिक करियर के शीर्ष पर थे। करीब दो दशकों तक उनका जलवा कायम रहा, लेकिन अब वह अपनी पार्टी आरजेडी की खराब हालत देखने को विवश हैं। आरजेडी का नेतृत्व भले ही वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कर रहे हैं, लेकिन कामकाज तेजस्वी यादव ही संभालते हैं। इस बीच बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिली है तो पार्टी से लेकर परिवार तक कलह मच गई है। बेटी रोहिणी आचार्य, बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने खुलकर तेजस्वी पर निशाना साधा है और उन्हें हार का जिम्मेदार बताया है। वहीं सोमवार को आरजेडी के विधायकों की मीटिंग में तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुन लिया गया।
यह मीटिंग भी घटनापूर्ण रही और कई मसले उठे। सबसे पहले तो तेजस्वी यादव ही भावुक हो गए और उन्होंने विधायकों से नेतृत्व से हटने तक की पेशकश कर दी। तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि विधायक चाहते हैं कि मैं हट जाऊं तो मैं इसके लिए तैयार हूं और किसी अन्य व्यक्ति को नेता चुना जा सकता है। इस दौरान लालू यादव खुद सामने आए और उन्होंने विधायकों से कहा कि वे तेजस्वी को नेता बने रहने के लिए मनाएं। इसके बाद लालू यादव ने विधायकों से यह भी कहा कि वे पार्टी को मजबूत करने पर फोकस करें। उन्होंने कहा कि परिवार का झगड़ा आंतरिक मसला है और इसे वह सुलझा लेंगे।
लालू यादव ने नेताओं से कहा कि परिवार का विवाद आतंरिक मसला है और मैं इसे सुलझा लूंगा। उन्होंने विधायकों से कहा कि वे फिलहाल संगठन को मजबूत करने पर फोकस करें। बता दें कि बिहार चुनाव की हार ने आरजेडी के आतंरिक झगड़े को सरेआम कर दिया है। तेजस्वी यादव के करीबियों पर बहन रोहिणी आचार्य ने ही हमला बोला है।
रोहिणी के अलावा बेटे तेजप्रताप भी खिलाफ, तेजस्वी पर क्या कहा था
उन्होंने संजय यादव और रमीज नेमत खान पर हमला किया था। उनका कहना था कि मैंने पार्टी और परिवार को छोड़ने का फैसला किया है। ऐसा ही करने के लिए मुझसे संजय यादव और रमीज खान ने कहा था। इसके साथ ही रोहिणी ने खुद पर चप्पल उछालने का भी आरोप लगाया था। वहीं इस मामले में हमला करते हुए तेजप्रताप ने तो अपने छोटे भाई को फेलस्वी करार दिया।
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