बिना व्यवस्था हुई परीक्षा, छात्रों की ठसाठस बैठने की शिकायत पर विश्वविद्यालय सख्त

राज्य

 

छपरा

बिहार में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक अव्यवस्था की तस्वीरें अक्सर सामने आती रही हैं। कहीं आधारभूत संरचना का अभाव है, तो कहीं शिक्षकों और कर्मियों की भारी कमी। इसी बीच उच्च शिक्षा प्रणाली की लचर स्थिति को उजागर करती एक और घटना सामने आई है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर स्थापित जयप्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) के स्नातक CBCS चार वर्षीय सत्र 2024–2028 की द्वितीय सेमेस्टर परीक्षा के दौरान गंभीर कुव्यवस्था सामने आई है।

परीक्षा में भरी अव्यवस्था
20 नवंबर 2025 को आयोजित स्नातक द्वितीय सेमेस्टर परीक्षा के दौरान सिवान जिला मुख्यालय स्थित राजा सिंह महाविद्यालय परीक्षा केंद्र की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इस तस्वीर में एक ही बेंच पर पांच-पांच और छह-छह परीक्षार्थियों को बैठाकर परीक्षा कराई जा रही थी। यह स्थिति न केवल परीक्षा अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि कदाचार की संभावना को भी बेहद बढ़ाती है। तस्वीर सामने आने के बाद छात्रों, अभिभावकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने जेपीयू प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की कड़ी आलोचना की। मेहनती छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।

विश्वविद्यालय ने तुरंत लिया संज्ञान, जारी किया नोटिस
वायरल तस्वीर को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशोक कुमार मिश्रा ने केंद्राधीक्षक को नोटिस जारी किया है। Letter No. CE 2456, Dated 21/11/2025 के माध्यम से दो दिनों के अंदर घटना पर स्पष्ट प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया है। पत्र के साथ वह वायरल तस्वीर भी संलग्न की गई है, जिसमें अव्यवस्था साफ दिखाई दे रही है।

केंद्राधीक्षक से कड़ा स्पष्टीकरण मांगा गया
पत्र में उल्लेख है कि परीक्षा केंद्र पर व्यवस्था की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और केंद्राधीक्षक की है। वायरल फोटो विश्वविद्यालय की साख को धूमिल करने वाली है और इस पर तत्काल जवाब आवश्यक है। सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई कर सकता है। कॉलेज प्रशासन की भूमिका, परीक्षा कक्षों की क्षमता और व्यवस्थाओं की कमी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस घटना ने उच्च शिक्षा में परीक्षा अनुशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि ऐसी अव्यवस्थाएं उनका भविष्य प्रभावित करती हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि जेपीयू कठोर कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

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