ऑरामाइन के इस्तेमाल को लेकर सांसद ने केंद्र को भेजी चिट्ठी, खाद्य सुरक्षा पर चिंता

देश

 नई दिल्ली/मुंबई

भुने हुए चने समेत कई खाद्य उत्पादों में रंगत बढ़ाने के लिए खतरनाक औद्योगिक डाई के गैर-कानूनी इस्तेमाल का मुद्दा राज्यसभा में उठ गया है. राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान को पत्र लिखा है और इस गंभीर खतरे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
 
शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने पत्र में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा, ''हाल के सबूतों से पता चलता है कि 'ऑरामाइन' एक इंडस्ट्रियल डाई है, जिसका इस्तेमाल कपड़ों और लेदर के लिए किया जाता है, इसे रंग बढ़ाने के लिए भुने हुए चने में गैर-कानूनी तरीके से मिलाया जा रहा है.

यह सिर्फ फूड सेफ्टी नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह लाखों भारतीय नागरिकों की हेल्थ, सेफ्टी और भरोसे के लिए खतरा है और
FSSAI की रेगुलेटरी निगरानी में नाकामी है. 

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत ऑरामाइन पर पूरी तरह से रोक है. इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर रिसर्च ऑन कैंसर (WHO) ने इसे एक संभावित कैंसर पैदा करने वाला माना है, जो लिवर, किडनी और ब्लैडर के कैंसर के साथ-साथ न्यूरोलॉजिकल नुकसान से जुड़ा है. 

इन साफ खतरों और रोक के बावजूद यह मिलावट बिना रोक-टोक के जारी है. मार्केट पर नजर कमजोर रही है, रूटीन टेस्टिंग काफी नहीं है, पब्लिक वॉर्निंग में देरी हुई है और लागू करने का तरीका खराब रहा है. कम्प्लायंस चेक भी काफी नहीं हैं और ऐसी कमियों के लिए कोई साफ जवाबदेही नहीं है. इन कमियों ने एक पूरी तरह से गैर-कानूनी और खतरनाक प्रैक्टिस को बिना किसी जांच या नतीजे के जारी रहने दिया है.''

FSSAI की निगरानी पर सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी ने खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि यह घटना FSSAI की नियामक निगरानी में नाकामी को दर्शाती है.

सांसद ने 'कफ सिरप' के खराब होने से हुई मौतों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार से जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने को कहा है. उन्होंने मांग की है कि इस मामले में तत्काल जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.

ऑरामाइन क्या है?: 
ऑरामाइन एक औद्योगिक डाई (Industrial Dye) है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर कपड़ों और चमड़े (लेदर) को रंगने के लिए किया जाता है. यह मानव उपभोग के लिए बेहद हानिकारक है.

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