कमान बदलने की मांग तेज: कांग्रेस नेता ने प्रियंका गांधी को बताया इंदिरा जैसा नेतृत्व

राजनीती

नई दिल्ली 
कांग्रेस के सीनियर नेता राशिद अल्वी ने पार्टी के हालात पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थिति कमजोर है। अल्वी ने कहा है कि कांग्रेस संगठन का हाल दयनीय हो गया है और इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस लीडरशिप जिम्मेदार है। अल्वी ने कहा है कि कांग्रेस संगठन का हाल दयनीय हो गया है और इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस लीडरशिप जिम्मेदार है। अल्वी के मुताबिक चुनावी मेहनत और तैयारी के मामले में भाजपा से मुकाबला करना तो दूर, कांग्रेस कहीं ठहर ही नहीं पा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ज़मीन पर काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस की मेहनत कहीं दिखाई नहीं देती।

राशिद अल्वी ने कांग्रेस हाईकमान की कार्यशैली पर भी तीखा सवाल किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से मुलाकात करना कांग्रेस नेताओं के लिए भी आसान नहीं है, जबकि इंदिरा गांधी से तो आसानी से मुलाकात हो जाती थी। अल्वी ने सुझाव दिया कि प्रियंका गांधी को पार्टी की बागडोर संभालनी चाहिए क्योंकि प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी की छवि दिखती है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आज हाशिये पर हैं। इसके लिए भी पार्टी लीडरशिप ही जिम्मेदार है। कांग्रेस के भीतर उठी इस आवाज़ ने संगठनात्मक हालत और नेतृत्व की शैली पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। उन्होंने बातचीत में कहा कि कांग्रेस पार्टी के अंदर जो सीनियर लीडर्स हैं, उन्हें लगता है कि उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है। वे महसूस करते हैं कि उनकी तरफ से कांग्रेस को मजबूत किया जा सकता है। आज सबसे ज्यादा जरूरी है कि हम उन लोगों की नाराजगी दूर करें, जिन लोगों को किनारे लगाया गया है। उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहिए। यही नहीं उन्होंने कर्नाटक में सीएम की कुर्सी को लेकर चल रही रस्साकशी को भी खत्म करने की अपील की। भाजपा नेता और राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का उदाहरण देते हुए राशिद अल्वी ने कहा कि हर पार्टी में उतार-चढ़ाव का दौर आता है। फिलहाल कर्नाटक में जो चल रहा है, वह चिंताजनक है।

वसुंधरा राजे के साथ राजस्थान में क्या हुआ? यह ध्यान देना चाहिए
राशिद अल्वी ने कहा, 'हर राजनीतिक दल के साथ ऐसा होता है। हम जानते हैं कि राजस्थान में वसुंधरा राजे के साथ क्या हुआ। हमें कर्नाटक की चिंता है। कांग्रेस पार्टी के मुखिया राहुल गांधी नहीं हैं बल्कि मल्लिकार्जुन खरगे हैं। उन्हें इस मसले को जल्दी से जल्दी हल करना चाहिए।' दरअसल कर्नाटक में डीके शिवकुमार के समर्थकों का कहना है कि सरकार गठन के दौरान ढाई-ढाई साल के लिए करार हुआ था और अब सिद्धारमैया को पद छोड़ देना चाहिए।

 

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