पटियाला/चंडीगढ़
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रिंसिपल बेंच ने ज़ीरकपुर, बनूड़ और राजपुरा क्षेत्र के निवासियों को साफ पीने का पानी उपलब्ध न कराने को लेकर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर नाराज़गी जताई।
मुख्य सचिव को जिम्मेदारी तय करने के निर्देश
NGT की बेंच ने पंजाब के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वे इस मामले में देरी के लिए ज़िम्मेदारी तय करें और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई शुरू करें। एडवोकेट सुनेना ने 2022 में इस मामले में NGT में मूल याचिका दायर की थी। रिपोर्टों में सामने आया है कि इस क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई के कारण लोग हैजा, पीलिया, टाइफॉइड, उल्टियां, पेट दर्द, डिहाइड्रेशन और त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। कई इलाकों में पानी पीने योग्य मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। जुलाई 2023 के आदेश के ढाई साल बाद भी हालात जस के तस हैं—लोग अभी भी अत्यधिक दूषित पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं और महंगा बोतलबंद पानी खरीदकर पी रहे हैं।
NGT का त्वरित राहत आदेश
NGT ने तात्कालिक राहत देते हुए राजपुरा नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी और पंजाब जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड के निदेशक को आदेश दिया है कि जब तक पानी की गुणवत्ता सुधर नहीं जाती, तब तक रोज़ाना टैंकरों के माध्यम से साफ पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए। अधिकारियों को 2 फरवरी 2026 को अगली सुनवाई में वर्चुअली उपस्थित होकर अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।
AMRUT योजना का कार्य भी अधूरा
राजपुरा नगर परिषद के अध्यक्ष नरिंदर शास्त्री ने NGT को बताया कि भाखड़ा ब्रांच से पानी की सप्लाई तो हो रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। वहीं, AMRUT योजना के तहत चल रहा प्रोजेक्ट भी अभी अधूरा है।
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