CBSE अपडेट: स्किल एजुकेशन अब मध्यकक्षा में अनिवार्य, नए बदलाव लागू

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नईदिल्ली 
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने मध्य कक्षाओं की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करते हुए क्लास 6वीं से 8वीं तक स्किल एजुकेशन को अनिवार्य विषय के रूप में लागू कर दिया है। बोर्ड का मानना है कि अब बच्चों को केवल किताबों, नोटबुक और रटकर पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन से जुड़े कौशल सीखने का अवसर मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से स्किल-बेस्ड लर्निंग को अब मेनस्ट्रीम एजुकेशन का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है।

यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सिद्धांतों के अनुरूप है। इसी के तहत CBSE ने इस सत्र से NCERT द्वारा तैयार की गई स्किल बोध सीरीज की किताबों को सभी एफिलिएटेड स्कूलों में लागू करना अनिवार्य कर दिया है। ये किताबें प्रिंट और डिजिटल दोनों स्वरूप में उपलब्ध होंगी, जिससे स्कूलों और छात्रों को इन्हें उपयोग करने में आसानी होगी।

नई स्किल बोध सीरीज़ में तीन प्रकार के प्रोजेक्ट शामिल

नई श्रृंखला के अनुसार, स्टूडेंट्स को तीन मुख्य श्रेणियों से जुड़े प्रोजेक्ट पूरे करने होंगे-

1. जीवों के साथ काम, जैसे पौधों और जानवरों की देखभाल

2. मशीनों और मटीरियल से जुड़े कार्य, जैसे बेसिक मैकेनिकल स्किल्स

3. ह्यूमन सर्विसेज, जैसे सामुदायिक सहायता और सेवा कार्य
हर कक्षा में छात्रों को तीन प्रोजेक्ट करने होंगे पूरे

    तीन साल में कुल नौ प्रोजेक्ट

    और लगभग 270 घंटे की प्रैक्टिकल लर्निंग की व्यवस्था की गई है।

इसका उद्देश्य बच्चों को यह सिखाना है कि शिक्षा सिर्फ यह नहीं कि वे क्या पढ़ते हैं, बल्कि यह भी है कि वे *क्या करते हैं और कैसे सीखते हैं।
स्कूलों को बदलना होगा टाइमटेबल

स्किल एजुकेशन को अनिवार्य किए जाने के साथ ही CBSE ने स्कूलों को टाइमटेबल बदलने के निर्देश दिए हैं।

    हर साल 110 घंटे (लगभग 160 पीरियड) केवल स्किल्स एजुकेशन के लिए निर्धारित किए जाएंगे।

    हर सप्ताह कम से कम दो लगातार पीरियड इस विषय के लिए अनिवार्य होंगे।

किताबों में दिए गए छह प्रोजेक्ट्स में से स्कूल अपनी स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के अनुसार तीन प्रोजेक्ट चुन सकेंगे।
टीचरों की बड़ी भूमिका

स्किल्स अवेयरनेस कार्यक्रम को लागू करने के लिए CBSE, NCERT और PSSIVE मिलकर टीचरों की व्यापक ट्रेनिंग आयोजित करेंगे। शिक्षकों को भी नई स्किल्स सीखनी होंगी, क्योंकि प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग में उनकी मार्गदर्शक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

मूल्यांकन पद्धति में भी बदलाव

CBSE ने स्किल्स एजुकेशन के मूल्यांकन को पारंपरिक पद्धति से अलग रखा है।

    10% लिखित परीक्षा
    30% वाइवा/प्रेजेंटेशन
    30% एक्टिविटी बुक
    10% पोर्टफोलियो
    20% शिक्षक का अवलोकन

 

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